पंजाब के निजी डेंटल कालेजों ने एमडीएस कोर्स की सभी सीटों की दाखिला प्रक्रिया को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की एकल बेंच के फैसले को डबल बेंच में चुनौती दी है। हाल ही में एकल बेंच ने सभी सीटों पर दाखिला बाबा फरीद यूनिवर्सिटी आफ हेल्थ साइंसेस के जरिए किए जाने का फैसला सुनाया था।
मंगलवार को जस्टिस एम. जयपॉल और जस्टिस तजिंदर सिंह ढींडसा की वेकेशन बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब सरकार और बाबा फरीद यूनिवर्सिटी को 4 जुलाई के लिए नोटिस जारी किया है।
दी पंजाब प्राइवेट सेल्फ फाइनांस्ड डेंटल कालेजेस एसोसिएशन के लिए डबल बेंच के समक्ष उपस्थित हुए एडवोकेट मनीष सिंगला ने हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग ने गत 30 दिसंबर को एक नोटिफिकेशन जारी कर प्रदेश के सभी मेडिकल व डेंटल कालेजों में स्नातकोत्तर और डिप्लोमा कोर्सों के अलावा छह माह की अल्ट्रा सोनोग्राफी ट्रेनिंग के लिए शैक्षिक सत्र 2016-17 में दाखिले को लेकर नया प्रावधान बनाया है।
इसके तहत राज्य कोटे की 50 फीसदी सीटों और निजी कालेजों की सभी सीटों पर दाखिले पोस्ट ग्रेजुएट एंट्रेंस टेस्ट-2016 के जरिए किए जाएंगे। इस एंट्रेंस टेस्ट में सामान्य वर्ग के लिए कम से कम 50 प्रतिशत और अनुसूचित जाति व जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग के लिए 40 प्रतिशत अंक लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
याचिकाकर्ता एसोसिएशन ने हाईकोर्ट की एकल बेंच में याचिका दायर कर उक्त नोटिफिकेशन को चुनौती दी थी। एसोसिएशन की दलील थी कि नए प्रावधान के तहत निजी कालेजों में मैनेजमेंट कोटे की 50 फीसदी सीटों पर दाखिला भी बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के जरिए किए जाने का प्रावधान डेंटल काउंसिल आफ इंडिया के प्रावधानों का उल्लंघन है क्योंकि अब तक निजी कालेज मैनेजमेंट कोटे की सीटें खुद भरते रहे हैं।
याचिका में यह भी कहा गया कि मैनेजमेंट सीटों पर केवल एंट्रेंस टेस्ट के जरिए ही नहीं बल्कि बीडीएस की मेरिट के आधार पर भी दाखिले किए जाते रहे हैं। लेकिन हाईकोर्ट की एकल बेंच ने इस याचिका को खारिज करते हुए सभी सीटों पर एंट्रेस टेस्ट के जरिए दाखिले को सही ठहराया था।
एकल बेंच के इसी फैसले को मंगलवार को चुनौती देते हुए जस्टिस एसएस सारों की कोर्ट की ओर से दिए गए एक फैसले को आधार बनाया गया, जिसमें जस्टिस एसएस सारों ने व्यवस्था दी थी कि निजी कालेजों में खाली सीटों पर कालेज प्रबंधन खुद ही बीडीएस की मेरिट के आधार पर दाखिले कर सकता है और ऐसे मामलों में एंट्रेंस टेस्ट जरूरी नहीं होगा। डबल बेंच ने याचिका स्वीकार करते हुए पंजाब सरकार और बाबा फरीद यूनिवर्सिटी से जवाब तलब कर लिया है।