पंजाब में दर्ज हुए 4 आपराधिक केसों के आधार पर ही अमेरिका में बब्बर खालसा के आतंकी बलविंदर सिंह पोसी को 15 साल की सजा सुनाई गई है। पंजाब पुलिस की क्राइम विंग की टीम, सीबीआई, गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के अधिकारी संयुक्त टीम बना लगातार टेली कांफ्रेंसिंग कर अमेरिकन एफबीआई से संपर्क में रहे। उन्होंने पंजाब से सारे तथ्य भेजे और बताया कि बलविंदर सिंह अमेरिका में बैठकर पंजाब में आतंकवाद फैलाने की कोशिश कर रहा है।
इनमें सबसे अहम केस महिलपुर थाना का बना। इसमें बलविंदर सिंह की मां और बहन को हथियारों समेत गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान पाया गया था कि बलविंदर पोसी ने अमेरिका से सारा फाइनेंस किया था। बलविंदर सिंह पोसी के खिलाफ जालंधर में 2002 में दो मामले दर्ज किए गए थे। इसमें एफआईआर नंबर 173 व 175 थे। दोनों वारदात जालंधर बस स्टैंड की थी, जहां पर केमिकल विस्फोट कर बसों को आग लगा दी गई थी।
इन केसों में जालंधर का आतंकवादी सत्ता गिरफ्तार किया गया था, जिसमें बलविंदर सिंह पोसी के शामिल होने की बात सामने आई थी। 29 जुलाई 2009 को पटियाला में रूलदा सिंह की हत्या कर दी गई थी। वे सिख संगत आरएसएस के नेता थे। इस हत्याकांड का तानाबाना भी विदेश से बुना गया था, जिसमें बलविंदर सिंह पोसी शामिल पाया गया था। चौथा केस 21 मार्च 2013 को महिलपुर थाने में दर्ज हुआ।
वहां पर बलविंदर सिंह पोसी के घर पुलिस ने छापामारी की। वहां से अमेरिका की पिस्तौल के अलावा काफी हथियार बरामद हुए। इस केस में पुलिस ने बलविंदर सिंह की मां सलविंदर कौर और बहन कुलविंदर कौर को गिरफ्तार कर लिया था। जांच के दौरान सामने आया कि बलविंदर सिंह पोसी ने अमेरिका सेे काफी पैसा भारत में आतंकवाद को जिंदा करने के लिए भेजा था।
इसमें स्थानीय क्राइम ब्रांच की टीम को पुख्ता सबूत मिले थे कि पोसी अमेरिका में बैठकर भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए संगठनों को फंड मुहैया करवा रहा है। इन सबूतों को आधार बनाकर पंजाब पुलिस की टीम ने केस को सीबीआई के हवाले कर दिया था, ताकि पोसी का प्रत्यार्पण हो सके।
दिसंबर 2013 में एफबीआई ने पोसी को किया था गिरफ्तार
जेल
सीबीआई के पास मामला जाने के बाद एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। इसमें सीबीआई के अधिकारी के अलावा पंजाब पुलिस क्राइम ब्रांच के डीआईजी, गृहमंत्रालय व विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को शामिल किया गया। सारे तथ्य अमेरिका में एफबीआई के पास भेजे गए। एफबीआई ने जांच के बाद पाया कि पंजाब पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम की ओर से भेजे गए सभी सबूत सही हैं।
19 दिसंबर 2013 को एफबीआई ने पोसी को गिरफ्तार कर लिया। उस पर अमेरिका में बैठकर विदेशों में आतंकवाद फैलाने, हत्या जैसे संगीन जुर्म के अलावा इमिग्रेशन के लिए फर्जी दस्तावेज बनाने का केस दर्ज हुआ। एफबीआई की टीम ने पाया कि बलविंदर सिंह 1997 से ही आतंकवादियों की मदद करने में लगा हुआ था। वह बब्बर खालसा के अलावा खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के संपर्क में भी था।
एफबीआई के मुताबिक बलविंदर पोसी ने 30 नवंबर 1997 को अपना नाम बदल कर फर्जी दस्तावेज तैयार कर रखे थे, ताकि अगर वह भारत जाए तो उसको एयरपोर्ट पर पकड़ा न जा सके। इस बीच बलविंदर सिंह पोसी पाकिस्तान भी गया, जहां पर वह आतंकवादी संगठनों के साथ मिलकर आया और साजिश रचकर आया कि कैसे पंजाब में आतंकवाद को दोबारा जिंदा किया जा सकता है। वहीं पर उसकी मुलाकात खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के चीफ रंजीत सिंह नीटा के साथ हुई थी।
पोसी के केस में हमारी टीम ने अच्छा काम किया
डीआईजी क्राइम जसकरण सिंह का कहना है कि बलविंदर सिंह पोसी के केस में हमारी टीम ने अच्छा काम किया। हमने सारे तथ्य और सबूत केंद्रीय एजेंसियों के जरिये एफबीआई को भेजे थे। महिलपुर केस में हमारे पास बलविंदर सिंह की संलिप्ता के ठोस सबूत थे, जिनको सीबीआई के माध्यम से अमेरिका भेजा गया।
बाकायदा केस में कई बार टेली कांफ्रेंसिंग हुई और सबूतों को आगे देखकर बलविंदर सिंह पोसी टूट गया था। उसने खुद ही एफबीआई के आगे अपना गुनाह कबूल कर लिया था। वैसे हमारी तरफ से प्रत्यार्पण का केस लगाया हुआ था, लेकिन अमेरिका में आतंकवाद को जिंदा करने की साजिश रचना गुनाह था। इस वजह से एफबीआई ने वहां पर हमारी सूचना के बाद गिरफ्तार किया और 15 साल की सजा सुनाई गई।