पटियाला के राजिंदरा अस्पताल में 31 जनवरी, 2009 को फोटोथेरिपी यूनिट में लगी आग से छह नवजात बच्चों की मौत मामले में कोर्ट ने एक डॉक्टर, एक स्टाफ नर्स और चौथा दर्जा मुलाजिम को लापरवाही बरतने का दोषी पाया।
एडिशनल सेशन जज रजिंदर अग्रवाल की अदालत ने वीरवार को तीनों आरोपियों को दो-दो साल की कैद की सजा सुनाई। साथ ही सभी पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा नहीं करने पर तीन माह की अतिरिक्त कैद काटनी होगी।
सरकारी वकील दीपिंदर कुमार जैन ने बताया करीब दो साल बाद 20 फरवरी 2011 को थाना सिविल लाइन में बच्चा विभाग के हेड रहे डा. केके लोचम निवासी एसएसटी नगर, स्टाफ नर्स रीटा कौर निवासी गांव बुर्ज जिला फतेहगढ़ साहिब व दर्जा चार मुलाजिम सत्या देवी निवासी अस्तबल कालोनी बारादरी बाग पटियाला के खिलाफ धारा 304 के तहत केस दर्ज हुआ था।
आरोप थे कि डा. लोचम समेत बाकी दोनों आरोपियों को लकड़ी से बनी फोटोथेरेपी मशीन के अलावा नर्सरी में घटिया स्तर की बिजली की फिटिंग के बारे में पता था। बावजूद इसके बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम नहीं उठाए गए।
गौरतलब है कि आग से पीलिया के इलाज के लिए फोटोथेरेपी यूनिट में लिटाए गए पांच नवजात बच्चों की जलने से मौत हो गई थी, जबकि एक ने इलाज के दौरान पीजीआई, चंडीगढ़ में दम तोड़ दिया था। मामले की जांच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रिटायर जज जस्टिस केसी गुप्ता को दी गई थी।