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आरोपी प्रिंसिपल पर तीन बार आरोप लगे, तीनों बार कांग्रेस ने बचाया : दुष्यंत

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अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। जींद के उचाना के सरकारी स्कूल में छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोपी प्रिंसिपल के मामले में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने एक और खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि साल 2005 में आरोपी उचाना के एक स्कूल में पढ़ाता था। वहां, आरोपी ने ट्यूशन पढ़ने वाली एक छात्रा से छेड़छाड़ की थी। परिजनों की शिकायत के बाद अध्यापक को निजी स्कूल से बर्खास्त किया गया। साल 2006 में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार के दौरान आरोपी शिक्षक को जेबीटी गेस्ट टीचर भर्ती किया गया। जबकि हुड्डा ने विधानसभा में अध्यापक की भर्ती 2008 में होने की बात कही थी। दो साल जेबीटी गेस्ट टीचर रहने के बाद आरोपी अध्यापक 2008 में हेडमास्टर भर्ती हुआ। साल 2010 में भी एक ऐसे ही मामले में उचाना में जिला स्तरीय एक जांच कमेटी ने मामले में लीपापोती करके आरोपी अध्यापक को बचाने का काम किया। बल्कि मिड डे मिल के एक वर्कर का इस्तीफा करवा दिया।
2012 में आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ का दोबारा मामला सामने आया और इसके खिलाफ गांव की सरपंच ने शिक्षा अधिकारी से लेकर शिक्षा मंत्री तक लिखित में शिकायत दी। उस दौरान जब जांच के लिए अधिकारी आए तो उचाना के एक स्कूल में सबके सामने हथियार दिखाकर उन्हें डराया धमकाया भी गया। इस दौरान आरोपी का तबादला भी किया गया लेकिन मात्र 19 दिनों के बाद ही पास के गांव में उसे दोबारा पोस्ट कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार शिक्षक पर छेड़छाड़ के आरोप लगते रहे लेकिन कांग्रेस ने उसका बचाव किया।
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हुड्डा को देना चाहिए स्पष्टीकरण
दुष्यंत चौटाला ने यह भी कहा कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा को विधानसभा में दिए अपने बयान कि डीडीआर दो साल में नष्ट हो जाती है पर स्पष्टीकरण देना चाहिए क्योंकि उस समय 2012 से 2014 तक गृह विभाग का जिम्मा उन्हीं के पास था। उन्होंने कहा कि फिलहाल मामले की जांच के लिए विधानसभा की कमेटी बनी है और सारे तथ्य देकर इस पूरे मामले की गहराई से जांच करवाएंगे। मामले में शामिल रहे सभी गवाहों के बयान दोबारा करवाए जाएंगे।
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