हार्ट ऑफ एशिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
हार्ट ऑफ एशिया में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अरशफ गनी से मिले। दोनों के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें कई मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने आतंकवाद का खात्मा, अफगानिस्तान में शांति एवं सुरक्षा में सहयोग और क्षेत्रीय संपर्क, माल परिवहन को लेकर आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। मोदी ने इस मुलाकात के दौरान कहा कि अफगानिस्तान और इस क्षेत्र में स्थिरता के लिए आतंकवाद और हिंसा का खात्मा जरूरी है।
मुलाकात के दौरान आतंकवाद से मुकाबले के लिये बहुआयामी रणनीति को अमल में लाने और सैन्य एवं पुलिस बलों की क्षमता निर्माण पर भी बात की गयी। पाकिस्तान सरकार द्वारा वाघा सीमा चौकी से अफगानिस्तान को माल परिवहन का रास्ता नहीं दिये जाने के मद्देनज़र दोनों देश हवाई माल परिवहन के एक समझौते पर विचार विमर्श कर रहे हैं। दोनों नेताओं ने इस संबंध में भी बातचीत की।
पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह और चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के दायरे को बढ़ा कर इसमें अन्य देशों को शामिल करने की रणनीति के जवाब में ईरान-अफगानिस्तान-भारत के चाबहार बंदरगाह परियोजना का भी विस्तार करके व्यापक रूप देने पर बात की गयी। जल्द ही चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जायेगा जिसमें इस बारे में फैसले लिए जाएंगे।
इस द्विपक्षीय वार्ता से पहले मोदी ने कई देशों के विदेश मंत्रियों से भी मुलाकात की। अफगान राष्ट्रपति ने भी सभी देशों के विदेश मंत्रियों से हाथ मिलाया। पाक पीएम नवाज शरीफ के एडवाइजर सरताज अजीज भी अफगान के राष्ट्रपति से मिले और उनका अभिवादन किया।
40 देश हिस्सा ले रहे हैं सम्मेलन में
अमृतसर में हार्ट ऑफ एशिया कांफ्रेंस
इस सम्मेलन में भारत, चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान समेत 14 देशों के वरिष्ठ अधिकारी इसमें हिस्सा ले रहे हैं, वहीं 17 सहयोगी देशों के प्रतिनिधि भी शिरकत कर रहे हैं।
कुल मिलाकर करीब 40 देशों और यूरोपीय यूनियन जैसे बड़े ग्रुप की भागीदारी से ही जाहिर है कि ये कॉन्फ्रेंस काफी अहम है। कॉन्फ्रेंस में इस बात पर भी चर्चा होगी कि कैसे अफगानिस्तान में शांति बहाली प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू किया जाए।
इसके अलावा अफगानिस्तान में शांति बहाली के प्रॉसेस को नए सिरे से शुरू करना। अफगानिस्तान का साउथ और सेंट्रल एशिया के देशों से जुड़ाव और उनके साथ ट्रेड बढ़ाने पर जोर। एशिया में आतंकवाद, कट्टरता और उग्रवाद के बढ़ते खतरे से निपटना आदि भी अहम मुद्दे रहेंगे।
सुरक्षा और संपन्नता इस कॉन्फ्रेंस की थीम है। पांच देशों के चाबहार रेलवे प्रोजेक्ट और तापी (TAPI- तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत) गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर भी चर्चा होगी।
मोदी और सरताज शनिवार को पहुंचे अमृतसर
पीएम मोदी पहुंचे अमृतसर
सम्मेलन में शिरकत के लिए प्रधानमंत्री मोदी शनिवार की शाम को अमृतसर पहुंचे। इससे पहले विभिन्न देशों के अधिकारियों ने सम्मेलन के एजंडे को अंतिम रूप देने के लिए बैठक की।
इस सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल के साथ वहां के प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अजीज भी शनिवार को अमृतसर पहुंच गए हैं। अजीज रविवार को अमृतसर पहुंचने वाले थे और उनका महज दो घंटे रुकने का कार्यक्रम था।
ऐसे में उनके शनिवार को ही भारत पहुंच जाने को अहम संकेत समझा जा रहा है। हालांकि भारतीय अधिकारियों ने इस दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लेकर किसी भी तरह की बातचीत से इनकार किया है।
आतंकवाद पर बात होगी, कश्मीर का मुद्दा नहीं उठाएगा पाक
sartaj aziz
सम्मेलन के तहत पाकिस्तान ने आतंकवाद के मुद्दे पर अब भारत से बात करने की इच्छा जताई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने शनिवार को अमृतसर में पत्रकारों से खास बातचीत में कहा कि वो भारत से आतंकवाद से जुड़े हर पहलू पर बात करने को इच्छुक है।
सरताज अजीज ने कहा कि हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में आने का हमारा मकसद यह साबित करता है कि हम अफगानिस्तान में शांति और सुरक्षा के लिए हार्ट ऑफ एशिया के महत्व को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मैं यहां क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा की प्रतिबद्धताओं को जाहिर करने और उस दिशा में बहुपक्षीय बातचीत के लिए भी आया हूं।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे को इस सम्मेलन में नहीं उठाएगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे के लिए हार्ट ऑफ एशिया उपयुक्त फोरम नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत में उनकी मौजूदगी इस बात की परिचायक है कि पाकिस्तान द्विपक्षीय बातचीत के लिए तैयार है।
क्यों आयोजित होता है ' हार्ट ऑफ एशिया'
अमृतसर में हार्ट ऑफ एशिया कांफ्रेंस
हार्ट ऑफ एशिया की शुरुआत 2 नवंबर ,2011 को इंस्ताबुल में हुई थी। यह कॉन्फ्रेंस कई चुनौतियों का सामना कर रहे अफगानिस्तान पर इस्तांबुल प्रक्रिया का हिस्सा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य अफगानिस्तान को स्थिरता व समृद्धि प्रदान करना है।
अफगानिस्तान के सहयोग के लिए स्थापित इस संगठन के 14 सदस्य देश हैं। इस संगठन में भारत के साथ पाकिस्तान, अफगानिस्तान, अजरबैजान, चीन, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, सऊदी अरब, ताजिकिस्तान, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
यह संगठन क्षेत्रीय देशों के बीच संतुलन साधने, समन्वय बैठाने व आपसी सहयोग बढ़ाने का भी काम करता है। हार्ट ऑफ एशिया में 14 सदस्य देश, 17 सहयोगी देश और 12 सहायक और अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हैं।