चुनाव की तारीख घोषित होते ही प्रदेश की सरकार चुनने के लिए काउंट डाउन शुरू हो चुका है। कुछ नेता पहले से ही सक्रिय थे तो अब हर नेता और पार्टी मतदाताओं को लुभाने की कवायद शुरू करेगी।
पिछले चुनाव का वोट प्रतिशत क्या रहा और इस बार क्या है तैयारी। किस की सरकार बनेगी, इसका फैसला वोटर 15 अक्टूबर को करेगा। प्रदेश में अब तक हुए चुनाव को लेकर रोचक पहलुओं से रू-ब-रू कराती मनोज कुमार और दिनेश कौशिक की रिपोर्ट।
यह महत्वपूर्ण है जानने के लिए
1996 के चुनाव में 4821 नेताओं ने दाखिल की थी नामांकन फाइल।
1996 व 1987 में 2025-2025 नेताओं की हुई थी जमानत जब्त।
1967, 1968 व 1972 में थी हरियाणा में विधानसभा की 81 सीटें।
चुनाव वर्ष वाइज मतदान की स्थिति
वर्ष------ उम्मीदवार-----कुल वोट-------कुल मतदान
1967------471----43,87,980---------72.65
1968------671----45,52,539---------57.26
1972------384----50,91,082--------70.46
1977------671----59,38,821---------64.46
1982-----1095----71,52,281---------69.87
1987-----1322----87,00,628---------71.24
1991-----1885----97,31,912---------65.86
1996-----1024----1,11,55,242-------70.54
2000------965-----1,11,53,242-------69.01
2005------983-----1,27,35,888-------71.96
2009------1222-----1,31,17,142------72.29
चुनाव प्रचार के लिए सिर्फ 31 दिन
विधानसभा चुनाव 15 अक्टूबर को होने हैं। चुनाव प्रचार 13 अक्टूबर की शाम पांच बजे बंद हो जाएगा। ऐसे में नेताओं और राजनीतिक दलों के पास समय सिर्फ 31 दिन का बचा है। कम समय होने से हरियाणा में अब राजनीतिक रंग तेजी से चढ़ने वाला है।
नेताओं को भी खूब दौड़ लगानी होगी। जिन पार्टियों ने अभी उम्मीदवार घोषित नहीं किये, उनके लिए हर वोटर तक पहुंचने के लिए ज्यादा ही मशक्कत करनी पड़ेगी। 19 अक्टूबर को रिजल्ट आयेगा। यानी 27 अक्टूबर तक नई सरकार बनना जरूरी है।
बिना लाल के विधानसभा का पहला चुनाव
ताऊ देवीलाल
सितंबर 1914 में जन्मे ताऊ देवीलाल दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। सीकर लोकसभा सीट से जीत कर वे दिसंबर, 1989 से जून, 1991 तक उप प्रधानमंत्री रहे। उनका निधन 6 अप्रैल 2001 को हुआ।
चौधरी बंसीलाल
देश व प्रदेश की राजनीति में दखल रखने वाले चौधरी बंसीलाल तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। पहली बार मई, 1968 से नवंबर 1975, दूसरी बार जुलाई, 1985 से जून, 1987 और तीसरी बार मई, 1996 से जुलाई 1999 तक। वे केंद्रीय रक्षा एवं रेल मंत्री भी बने थे। इनका जन्म अगसत, 1927 में हुआ। निधन 2006 में।
चौधरी भजनलाल
राजनीति में पीएचडी माने जाने वाले चौधरी भजन लाल जून, 1979 से जनवरी, 1980 तक मुख्यमंत्री रहे। कुछ दिन सियासत में आए बदलाव केबाद फिर इसी साल मुख्यमंत्री बन गए और 1985 तक बने रहे। जुलाई 1991 से 1996 तक भी ये मुख्यमंत्री रहे। अक्टूबर, 1930 को जन्म भजनलाल का निधन जून, 2011 में हुआ। वे दो बार सांसद भी रहे।
ये है हरियाणा के दिग्गजों की स्थिति
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर तीसरी बार सरकार का दारोमदार। 2014 के लोकसभा चुनाव में केवल एक सीट रोहतक की ही बचा पाए थे।भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रामबिलास शर्मा लोकसभा में पार्टी की जीत से उत्साहित हैं। अब विधानसभा चुनाव में उन पर नजर रहेगी। वे सीएम पद के दावेदार भी हैं।अभय सिंह चौटाला को पूरी पार्टी संभालनी है। ज्यादातकर टिकट घोषित कर चुके हैं। पूरे हरियाणा का प्रचार उन्हीं पर निर्भर है।भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद कुलदीप बिश्नोई पर पूरी पार्टी का बोझ टिका है। पार्टी में अकेले बड़े चेहरे हैं। कुलदीप अब विनोद शर्मा के साथ मिलकर मैदान में आने की तैयारी में हैं।कांग्रेस से किनारा कर भाजपा में शामिल हुए बीरेंद्र सिंह पर भाजपा को ज्यादा सीटें जितवाने का दबाव रहेगा। वे भी सीएम पद की दौड़ में हैं।तीन बार सांसद रह चुके अरविंद शर्मा ने कांग्रेस छोड़कर बसपा का दामन थामा है तो अब पार्टी को जितवाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की रहेगी।निर्दलीय चुनाव लड़कर कांग्रेस सरकार में मंत्री बने गोपाल कांडा ने अपनी अलग हलोपा पार्टी बना ली है। प्रचार में जुटे हैं। देखना है कितनी सीट जीत पाते हैं।कांग्रेस में कभी किंगमेकर रहे विनोद शर्मा अपनी अलग पार्टी हरियाणा जन चेतना नाम से बनाकर हजकां से गठबंधन कर चुके हैं और मैदान में उतरने को तैयार हैं।