फर्नीचर मार्केट तोड़ने की मुनादी से कारोबारियों में हड़कंप है। इससे पहले फरवरी 2025 में भी इस मार्केट को हटाने की पूरी तैयारी कर ली गई थी लेकिन तब राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई रोक दी गई थी। हालांकि, अब प्रशासन एक बार फिर इस दिशा में सख्ती से आगे बढ़ रहा है।
चंडीगढ़ सेक्टर-53 और 54 की फर्नीचर मार्केट पर तलवार लटक गई है। प्रशासन ने इस मार्केट को अवैध घोषित करने के बाद अब इसे तोड़ने के अभियान को फिर तेज कर दिया है। शनिवार को पूरे बाजार में मुनादी कराई गई। दुकानदारों को तीन से चार दिनों के भीतर दुकानें खाली करने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह मार्केट सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बसी हुई है।
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प्रशासन की इस कार्रवाई की घोषणा के बाद फर्नीचर कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। फर्नीचर मार्केट एसोसिएशन के प्रधान संजीव भंडारी ने इस कार्रवाई को गलत बताया है। उनका कहना है कि सभी कारोबारियों को वैकल्पिक जगह देने की बात हुई थी, जिसके बिना यह कार्रवाई करना अनुचित है। भंडारी ने बताया कि वे इस संदर्भ में सोमवार को डीसी और अन्य आला अधिकारियों से बात करने की कोशिश करेंगे।
सरकारी जमीन पर कब्जा, आवंटन में प्राथमिकता नहीं
एस्टेट ऑफिसर-कम-डीसी ने 9 जनवरी 2025 को आदेश जारी कर सेक्टर-53 और 54 में फर्नीचर व्यवसाय से जुड़े व्यक्तियों को भूमि आवंटन में विशेष प्राथमिकता देने की मांग को खारिज कर दिया था। प्रशासन के अनुसार, जिस भूमि पर यह व्यवसाय चल रहा है, उसे 14 फरवरी 2002 को अधिगृहीत किया गया था और इसका अधिग्रहण सेक्टर-53, 54 और 55 के विकास के लिए किया गया था। हालांकि, कारोबारियों का दावा है कि उनकी दुकानें 1986 से यहां स्थापित हैं।
प्रशासन ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2020 के इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम मनोहरलाल मामले के फैसले का हवाला दिया है। इसके अनुसार सरकारी भूमि पर अवैध रूप से व्यवसाय करने वालों को अतिक्रमणकारी माना जाएगा और उन्हें भूमि आवंटन में कोई प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। यह स्थिति सेक्टर-53 और 54 की 116 फर्नीचर दुकानों के भविष्य को अनिश्चित बना रही है।