जिस पति की मौत के बाद शव चिकित्सीय शोध के लिए मेडिकल कॉलेज को देना एक महिला के लिए अभिशाप बन गया है। महिला मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए पिछले एक साल से दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। मामला हरियाणा के डबवाली का है।
जिला जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिकारी इस महिला को न्याय नहीं दे रहे। वार्ड नंबर तीन निवासी सरोज रानी ने बताया कि उसके पति राजकुमार उर्फ अशोक कुमार शुगर की बीमारी से ग्रस्त थे। एक मई 2014 को उनकी मृत्यु हो गई थी। डेरा सच्चा सौदा सिरसा की शिक्षा पर अमल करते हुए उसने अपने पति के शरीर का दाह संस्कार किए बगैर अलीगढ़ स्थित मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट को दान कर दिया, ताकि मेडिकल क्षेत्र में होनहारों का भविष्य उज्ज्वल हो सके।
इस संबंध में इंस्टीट्यूट की ओर से उन्हें प्रमाण पत्र भी जारी किया गया। मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए उसने नगर परिषद कार्यालय में अप्लाई किया। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिकारी सिरसा ने आपत्ति लगाकर आवेदन को वापस नगर परिषद के पास भेज दिया। उसने आपत्तियों को दूर करते हुए पुन: आवेदन किया।
साथ में मेडिकल इंस्टीट्यूट का पत्र संलग्न किया। इसके बावजूद इस बार फिर आवेदन वापस नगर परिषद में आ गया है। दोबारा फिर उससे उपरोक्त प्रमाण पत्र की असल कॉपी मांगी जा रही है, जबकि वह उसने पहले ही भेज दिया था। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का खामियाजा उसे भुगतना पड़ रहा है।