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डेंगू और चिकनगुनियाः कब चेक करवाएं प्लेटलेट्स और क्या लें डाइट?

Sun, 09 Oct 2016 09:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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अस्पताल में मरीज - फोटो : अमर उजाला
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सर्दी ने दस्तक दे दी है, लेकिन डेंगू व चिकनगुनिया के केसों में कोई गिरावट नहीं आ रही है। उल्टा लोगों में पैनिक बढ़ने लगा है। डॉक्टरों का कहना है पैनिक फैलने के पीछे कुछ कारण हैं, जिनसे आसानी से बचा जा सकता है।
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देखने में आया है कि कुछ लोग प्राइवेट लैब से जांच करवा रहे हैं, जिससे उनकी रिपोर्ट में काफी अंतर मिल रहा है। कई केस देखने को मिले, जिनमें मरीजों के पास प्राइवेट लैब की रिपोर्ट थी, उसमें प्लेटलेट्स की मात्रा 20-15 हजार थी, लेकिन मरीज में ऐसा कोई भी लक्षण नहीं था, जिससे कि मरीज गंभीर हो।

बाद में सरकारी लैब में जांच करवाई गई तो मरीज के प्लेटलेट्स ठीक मिले। डॉक्टरों का कहना है कि यदि कोई जांच करवानी है तो अच्छी लेबोट्री से करवाएं। कोशिश करें उन लैब से करवाएं, जहां पर पैथोलॉजिस्ट हो। या फिर सरकारी अस्पताल में करवाएं।
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कब करवाएं प्लेटलेट्स चेक

डेंगू से डरे नहीं लड़ें - फोटो : File Photo
1. बुखार के साथ शरीर में लाल चक्कते पड़ जाएं
2. मुंह या शरीर के किसी हिस्से से खून निकल रहा हो
3. आंखे खून जैसी लाल हो
4. नब्ज, बेहोशी, थकान और चक्कर आ रहे हों

यहां पर मुफ्त की रही है डेंगू की जांच
पीजीआई, जीएमसीएच 32, जीएमएसएच 16 और मनीमाजरा हॉस्पिटल में डेंगू के मुफ्त टेस्ट होते हैं। यदि सरकारी में नहीं जाना चाहते हैं तो प्राइवेट लेबोट्री में टेस्ट करवा सकते हैं। चंडीगढ़ प्रशासन ने प्राइवेट लैब में डेंगू टेस्ट के 600 रुपये निर्धारित किए हैं। एंटीजेन विधि से ही डेंगू का टेस्ट करवाएं। प्लेटलेट्स टेस्ट के 50 रुपये निर्धारित किए गए हैं।

लिक्विड डाइट और खूब आराम करें

डेंगू - फोटो : अमर उजाला
विशेषज्ञों का मानना है कि बुखार कोई भी हो, शरीर में पानी व मिनरल्ज की कमी नहीं होनी चाहिए। इसकी कमी होने पर ब्लड सरकुलेशन प्रभावित हो सकता है और ब्लड प्रेशर नीचे आ जाता, जिसका शरीर के अन्य अंगों पर पड़ता है।

इससे मरीज को बेहोशी आना, नब्ज कमजोर पड़ना जैसे लक्षण आते हैं। कई बार तो देरी होने पर मरीज की मौत तक हो जाती है। बुखार होने के बाद शरीर में इलेक्ट्रोलाइट (सोडियम व पोटेशियम) व पानी की कमी मरीज की परेशानी बढ़ा सकते हैं।

डेंगू व चिकनगुनिया के मरीजों को दिन में कम से कम दो से तीन लीटर नींबू शिकंजी या ओआरएस घोल पीना चाहिए। प्लेटलेट्स भी अपने आप ऊपर आने लगते हैं। डॉक्टर को भी अवश्य दिखाएं, क्योंकि बुखार के अलग-अलग प्रकार के हैं।

इन तरीकों को अपनाएं और बचाव करें

अस्पताल के बाहर मरीज - फोटो : अमर उजाला
यदि बुखार नहीं उतर रहा है तो हल्के ठंडे पानी से नहा लें। किसी भी बुखार में नारियल और नीबू-चीनी-नमक-पानी का घोल पीते रहें मरीज को एसी या कूलर में भी रख सकते। कूलर की सफाई पर पूरा ध्यान दें मरीज की उम्र पांच से कम है या फिर 60 साल से ज्यादा है तो तुरंत डॉक्टर से मिलें बुखार के साथ डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, किडनी या लिवर की समस्या है तो डॉक्टर से मिलें हार्ट पेशेंट को भी डॉक्टर की सलाह से लेना जरूरी होता है। प्लेटलेट्स 50 हजार या इससे नीचे हों, दिमागी हालत गड़बड़ लगे तो एडमिट कराना जरूरी।   प्लेटलेट्स 1 लाख तक हों तो दिन में एक बार काउंट चेक करा लें।

इन उपायों को अपनाकर भी बच सकते हैं

डेंगू
60 हजार तक पहुंच जाएं तो दिन में दो बार चेक करा लें। बुखार में एस्प्रिन, डिस्प्रिन, कांबिफ्लेम, ब्रूफेन की दवा बिल्कुल न लें इन दवाओं से प्लेटलेट्स कम हो सकती है और शरीर से ब्लीडिंग शुरू हो सकती है। किसी भी तरह के बुखार में सबसे सुरक्षित पैरासेटामॉल है। जब तक प्लेटलेट्स 20 हजार या उससे कम न हों, प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती। लोग बुखार में आराम नहीं करते, जबकि बुखार में आराम दवा का काम करता है। बुखार में तरल पदार्थ खूब पीएं। कम से कम 12-15 गिलास इसमें सूप, दूध, छाछ, लस्सी, नारियल पानी, ओरआरएस का घोल, जूस व शिकंजी ले सकते हैं।
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ये कहना है जीएमसीएच के डॉक्टर का

doctor shimla
बुखार होने पर लोगों को अस्पताल के बजाय नजदीक की डिस्पेंसरी में दिखाएं। लगभग हर सेक्टर में डिस्पेंसरी है। इनके डॉक्टर और एएनएम ट्रेंड हैं। अस्पताल में भी 99 प्रतिशत मरीजों को दवा देकर वापस भेजा जा रहा है। सिर्फ एक प्रतिशत मरीजों को दाखिल करने की जरूरत पड़ती है। इससे बेवजह भीड़ बढ़ रही है, जिससे अन्य मरीजों को मुश्किल आ रही है। डेंगू और चिकनगुनिया में इसी हफ्ते से राहत शुरू होने की उम्मीद है। कामन कोल्ड और फ्लू से बचना होगा। साथ डेंगू की जांच सरकारी अस्पताल की लैब से ही करवाएं। कई प्राइवेट लैब की रिपोर्ट में अंतर मिल रहा है।
- डॉ. गोपाल भारद्वाज, एचओडी मेडिसिन, जीएमएसएच 16
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