पंजाब से राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपील की है कि केंद्र सरकार किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच बढ़ रहे तनाव को खत्म करने के लिए तीनों कृषि कानूनों को वापस ले। उन्होंने कहा कि यह समय दरियादिली दिखाने का है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रदर्शनकारी किसान दिल्ली सीमा से अपने घरों को लौट जाएं।
संसद के अगले मानसून सत्र (जो छह माह बाद होगा) में गहन विचार विमर्श कर नए सिरे से प्रस्ताव पेश किए जाएं। कानूनों से देश भर के किसानों की व्यापक मंजूरी को यकीनी बनाने के लिए सरकार और संसद के सभी स्त्रोतों का उपयोग करते हुए दोनों सदनों में गंभीरता से विचार विमर्श की जरूरत है।
बाजवा ने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलनकारी किसानों को दो हफ्ते से ज्यादा समय हो गया है और अब तक आंदोलन खत्म होने के आसार नजर नहीं आ रहे। ऐसे में भारत सरकार को किसान संगठनों के साथ बढ़ रहे अपने फासले के खत्म करने के लिए कदम उठाने चाहिए।
आढ़ती पंजाब में कृषि की रीढ़ हैं : सिंगला
पंजाब के शिक्षा एवं लोक निर्माण मंत्री विजय इंदर सिंगला ने मोदी सरकार पर बरसते हुए कहा कि आढ़ती केंद्र सरकार के अनुमान के अनुसार बिचौलिए नहीं हैं, बल्कि पंजाब में कृषि की रीढ़ हैं। आढ़ती दुख-सुख की हर घड़ी में किसानों की सहायता करते हैं। ये पंजाब में कृषि मंडीकरण क्षेत्र के केंद्र के तौर पर काम करते हैं।
सिंगला ने कहा कि आढ़ती हर छोटी-बड़ी जरूरत पर किसानों की मदद करते हैं। वह एक कमीशन एजेंट के तौर पर काम करते हैं लेकिन यह एक सहज और सार्थक रिश्ता है। आढ़ती कृषि भाईचारे का जरूरी हिस्सा हैं और मोदी सरकार उनके संबंधों को समझने के बजाय इसको नकारात्मक ढंग से पेश कर रही है।
भाजपा नेताओं से सवाल करते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि क्या स्टॉक एक्सचेंज मार्केट दलाली या न्यायिक अदालतें कानूनी सलाहकारों के बिना काम कर सकतीं हैं। किसानों को भी कृषि क्षेत्र में आढ़ती जैसे पक्के साथ की हर समय जरूरत है। आढ़ती अपने साथ जुड़े किसानों को कृषि में नई तकनीक संबंधी राह दिखाने के साथ-साथ दूसरे पहलुओं पर भी उनका मार्गदर्शन करते हैं।