शादियों में चढ़ने लगा किसान आंदोलन का रंग।
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कृषि सुधार कानूनों का विरोध अब पंजाब में विवाह समारोह में भी दिखाई देने लगा है। ऐसा ही अनोखा मामला पंजाब के मुक्तसर के गांव बरीवाला के विवाह समारोह में सामने आया। दूल्हे ने अपने हाथों पर किसान एकता जिंदाबाद लिख मेहंदी रचाई और अपनी गाड़ी के आगे किसानी का झंडा लगाया और बरात लेकर निकल पड़ा। बरात रवाना होने से पहले किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगाए गए। अन्य गानों के बजाय बराती भी किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगाते हुए चल रहे थे।
दूल्हे संदीप सिंह पुत्र लखवीर सिंह का कहना है कि वह किसान परिवार से संबंध रखता है। उसका शादी समारोह चल रहा है लेकिन मानसिक रूप से वे सभी इस समय टिकरी बॉर्डर पर किसानों के संघर्ष में शामिल हैं। किसानों के समर्थन में अपने शादी समारोह को किसान आंदोलन का रंग दिया है। शादी के बाद 15 दिसंबर को मैं करीब 20 लोगों के साथ दिल्ली संघर्ष में शामिल होने जाऊंगा। संदीप ने बताया कि इससे पहले भी उनके परिवार व रिश्तेदारी के करीब 20 लोग किसान आंदोलन में शामिल होने दिल्ली जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि युवाओं का जोश व बुजुर्गों का तजुर्बा इस किसान आंदोलन में काम आ रहा है। केंद्र सरकार जब तक कृषि कानूनों को रद्द नहीं करती, तब तक किसानों का संघर्ष जारी रहेगा। गौरतलब है कि पिछले दिनों जिले के गांव शेखू में एक विवाह समारोह में किसानों के समर्थन में शगुन के करीब 80 हजार रुपये एकत्र किए गए थे और फिर इन रुपयों को दिल्ली सीमा पर डटे किसानों को भेजा गया था।
वहीं जिले के गांव भुल्लर के एक दूल्हे ने भी शादी के लिए बरात लेकर जाते समय अपनी गाड़ी के आगे किसानी संघर्ष के समर्थन में झंडा लगाया। गांव भुल्लर के युवक गुरप्रीत सिंह ने विवाह बंधन में बंधने से पहले बरात वाली कार पर किसान यूनियन का झंडा लहराया। गुरप्रीत ने कहा कि केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसान परिवारों के सभी त्योहार व समारोहों को संघर्ष का रूप दे दिया है।