पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसीसी) अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा है कि अकाली दल की सरकार के दौरान पंजाब रोडवेज व पीआरटीसी भारी घाटे का सामना कर रहे हैं।
2006-07 में 886 बसों के मुकाबले सरकारी बसों की संख्या जनवरी, 2014 में घटकर 451 को पहुंच गई है, जो आधे के करीब है। बाजवा ने बताया कि प्रदेश कांग्रेस के आरटीआई सेल के संयोजक डॉ. जसदीपक सिंह ने यह जानकारी आरटीआई के माध्यम से हासिल की है।
पीआरटीसी भी घाटे में रही
उन्होंने कहा कि इस दौरान दूसरे सरकारी परिवहन निगम पीआरटीसी का भी यही हाल रहा। दोनों संगठन भारी घाटे का सामना कर रहे हैं, जबकि प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर बादल का बिजनेस इनकी लागत पर बढ़ता जा रहा है।
भाजपा नशा तस्करी की गंभीरता की कड़वी असलियत का स्वाद ले चुकी है। अमृतसर में तस्करों को सियासी संरक्षण भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेतली की हार का मुख्य कारण बना।
अवैध खनन पर सुखबीर को चुनौती
बाजवा ने उप मुख्यमंत्री को रेत के अवैध खनन पर चुनौती देते हुए कहा कि अकाली नेताओं का रेत पर एकाधिकार है और राज्य सरकार सीधे तौर पर खदानों की पर्यावरण क्लीयरेंस का मामला पेश करने की बजाय रेट बढ़ाने के लिए बनावटी कमी पैदा कर रही है। हर कोई जानता है कि भाजपा मंत्रियों के विभागों पर उनकी कम चलती है।
बादल परिवार की ट्रांसपोर्ट कंपनियों को अनुचित फायदा
पीपीसीसी महासचिव राजनबीर सिंह ने कहा है कि सरकारी ट्रांसपोर्ट बसों की कीमत पर सत्तारूढ़ बादल परिवार की ट्रांसपोर्ट कंपनियों की बसों पर फायदों की अनुचित बारिश हो रही है।
इसने सरकारी बसों के कर्मचारियों को विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर कर दिया है। इस मुद्दे पर जालंधर रोडवेज इंप्लायज द्वारा किए जा रहे विरोध का समर्थन किया।