हरियाणा सरकार द्वारा वहां के गुरुद्वारों के प्रबंध के लिए अलग से प्रबंधक कमेटी बनाने के प्रयासों के विरुद्ध शिअद का एक शिष्टमंडल वीरवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिला।
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की अगुवाई वाले इस प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री राजनाथ से अपील की कि हरियाणा सरकार को ऐसा करने से रोका जाए।
वहीं, सहजधारी सिखों का मसला हल करने की भी उनसे मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल में सांसद बलविंदर सिंह भूंदड़, सुखदेव सिहं ढींडसा, नरेश गुजराल, रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा, प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा तथा शेर सिंह घुबाया शामिल थे।
राजनीतिक दांवपेंच में फंसी सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी
हरियाणा की अलग सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी गठित करने का मामला कानूनी राय से ज्यादा राजनीतिक दांव-पेंच में फंसा हुआ है। दो बार वादा करने के बावजूद हरियाणा की कांग्रेस सरकार यह कमेटी आज तक नहीं बना सकी है। विधानसभा में बहस भी करवाई, मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत तत्कालीन दिग्गज मंत्रियों और विधायकों ने प्राइवेट प्रस्ताव का समर्थन किया, मगर प्रस्ताव बहस करके खुला छोड़ दिया।
दरअसल, कांग्रेस ने वादा किया था कि अगर वह सत्ता में आई तो हरियाणा के सिखों की मांग को पूरा करेगी। सिखों की मांग थी कि हरियाणा की अलग सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एचएसजीपीसी) गठित की जाए। कांग्रेस ने सरकार में आते ही तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष हरमोहिंदर सिंह चट्ठा की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर दी थी।
कमेटी को हरियाणा के सिखों की राय जानकर सरकार को रिपोर्ट सौंपनी थी। हालांकि बाद में चट्ठा कृषि मंत्री बन गए थे। चट्ठा कमेटी ने सिखों से शपथ पत्र के जरिए उनकी मांग परखनी शुरू कर दी कि 15 मार्च, 2007 को हरियाणा विधानसभा में तत्कालीन कांग्रेस विधायक निर्मल सिंह से अलग सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी गठित करने के लिए प्राइवेट प्रस्ताव पेश करवा दिया। इस प्रस्ताव पर करीब तीन घंटे बहस हुई। उस समय इनेलो के सभी नौ विधायक विधानसभा में नहीं थे।
यह था निर्मल सिंह का प्रस्ताव
हरियाणा में सिखों की सदैव ही सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सहित अपने धार्मिक मामलों और सभी धार्मिक संस्थाओं के स्वत: संचालन के लिए महत्वाकांक्षी रही है। दिल्ली राज्य में भी पृथक एसपीजीसी का गठन किया गया है। इसलिए मैं इस सदन से संकल्प पारित करने का आग्रह करता हूं कि हरियाणा में सिखों को अपने सभी गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक संस्थाओं के नियंत्रण पर विचार करते हुए एक कानून के अधिनियमन द्वारा पृथक हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाकर उनकी धार्मिक संस्थाओं के स्वशासन के अधिकार के लिए उनकी महत्वाकांक्षाओं का एक प्रतिबिंब अवश्य प्राप्त हो सके।
मुख्यमंत्री का समापन भाषण
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस प्रस्ताव पर हुई बहस का समापन करते हुए कहा था, ‘निर्मल सिंह जो प्रस्ताव लेकर आए हैं, यह एक माइनारिटी कम्यूनिटी की भावना है और हम उसका समर्थन करते हैं। हमारी सरकार की उनके प्रति जिम्मेवारी बनती है। व्यक्तिगत तौर पर मैं और बाकी लोग भी चाहते हैं कि हरियाणा में अलग एसजीपीसी बननी चाहिए। इनकी भावना को देखते हुए हमने हरमोहिंदर सिंह चट्ठा में एक कमेटी का गठन किया हुआ है। चट्ठा साहब की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। रिपोर्ट आते ही सरकार उस पर उचित कदम उठाएगी ताकि सिख भाइयों की भावना की कद्र हो सके।’
इन्होंने किया था समर्थन
चट्ठा ने हरियाणा के गुरुद्वारों की संपत्ति जानकारी दी थी। प्रस्ताव का समर्थन करने करने वालों में रणदीप सुरजेवाला, बीरेंद्र सिंह, केएल शर्मा, गीता भुक्कल, नरेश मलिक, दिल्लू राम, फूलचंद मुलाना, परमवीर सिंह, जय सिंह राणा, राम कुमार गौतम, शमशेर सिंह सुरजेवाला, शादी लाल बत्तरा, करण सिंह दलाल, बचन सिंह आर्य और अमीर चंद मक्कड़ शामिल थे। प्रस्ताव पर बहस पूरी होते ही विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी और प्रस्ताव बिना फैसले के यूं ही रह गया।
क्या सीएम 6 जुलाई को सिख सम्मेलन में घोषणा करेंगे?
हरियाणा के सिखों ने 6 जुलाई को कैथल में सिख सम्मेलन आयोजित किया है। सम्मेलन के आयोजक जगदीश झींडा ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और वित्त मंत्री हरमोहिंदर सिंह चट्ठा को सम्मेलन में बुलाया है। उम्मीद की जा रही है कि मुख्यमंत्री इस सम्मेलन में अलग कमेटी गठित करने की घोषणा कर सकते हैं क्योंकि मुख्यमंत्री पिछले कुछ दिनों से अलग कमेटी गठित करने के संकेत दे रहे हैं।