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Chandigarh News: बहन की शादी में प्रज्ञा और कृष्ण की आंखें हुई थीं चार

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चंडीगढ़। बात वर्ष 1974 की है। मेरी बहन की चंडीगढ़ के सेक्टर-11 में शादी थी। उस शादी में मेरी होने वाली पत्नी प्रज्ञा भी आई थीं। हम दोनों एक-दूसरे से अनजान थे। शादी के दिन ही हमने एक-दूसरे को देखा। उनका घर सेक्टर-22 में था और मेरा 15 में। मेरे बहनोई और प्रज्ञा के पिता गहरे दोस्त थे। जब भी मेरे जीजा कहते सेक्टर-22 में प्रज्ञा के घर चलना है, तो वे तुरंत ही सब काम छोड़कर तैयार हो जाते और उनके साथ मोटरसाइकिल पर पीछे बैठक प्रज्ञा के घर पहुंच जाते। धीरे-धीरे आना-जाना होने लगा, लेकिन यह बहुत संवेदनशील था। किसी को पता भी न चले, इसका पूरा ख्याल रखा जाता। प्रज्ञा भी अपनी मां के साथ सेक्टर-15 में कृष्ण कुमार शारदा के घर उनकी मां को देखने आया करती थीं।
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ये बातें सेक्टर-43 निवासी कृष्ण कुमार शारदा ने कहीं। कृष्ण कुमार शारदा पंजाब खादी बोर्ड के तकनीकी अधिकारी पद से सेवानिवृत हैं। वे पंजाब खादी सेवा संघ और आचार्यकुल चंडीगढ़ के भी अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि उनकी शादी प्रेम करने के तीन वर्ष बाद 1977 में हुई। प्रज्ञा शारदा कहती हैं कि मेरे पति बहुत संवेदनशील हैं। मेरी हर छोटी बातों का ख्याल रखते हैं। उन्होंने मुझे एमए एमएड करवाया। चंडीगढ़ शिक्षा विभाग में नौकरी की। अब रिटायर्ड हो गई हूं। कृष्ण कुमार शारदा ने बताया कि हम एक-दूसरे के सहयोगी हैं। वर्ष 1974 से 2024 कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। हमारा कभी विवाद भी नहीं हुआ।
कृष्ण कुमार शारदा का कहना है कि प्रज्ञा अपनी मां के साथ मेरे घर बीमार मां को कभी-कभी देखने आतीं। हम सभी अकेले रहते थे। मां बीमार थी तो किचन भी अस्त-व्यस्त था। प्रज्ञा चाय भी बनातीं और किचन संभालकर अपनी मां के साथ चली जाती थीं।
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