नरेंद्र मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना सिटी में दम तोड़ रही है। सांसद किरण खेर का सहारा भी उज्ज्वला योजना की लौ को तेज नहीं कर पा रहा। यही वजह है कि चंडीगढ़ के कई गांवों में गरीब परिवारों के लिए जोरशोर से लांच की गई यह योजना उदासीनता के चलते परवान नहीं चढ़ सकी है। हाल यह है कि गांवों में सर्वे के बावजूद चार माह बीतने पर भी सैकड़ों बीपीएल परिवारों को योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन नहीं मिल पाया है। जिन्हें मिला भी है, उनकी गैस खत्म होने के बाद इतना पैसा नहीं है कि दोबारा गैस की रिफीलिंग करा सकें। मजबूरन इन परिवारों को खाना बनाने के लिए अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
गैस खत्म, कहां से भराएं : चंडीगढ़ शहर भले ही अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है, लेकिन यहां के गांव धनास, डड्डूमाजरा, दरिया सहित कई गांवों में सैकड़ों की संख्या में लोग गरीबी में जीवनयापन कर रहे हैं। धुआं निगल कर चूल्हे पर खाना बनाना महिलाओं की मजबूरी है। पीएम की उज्ज्वला योजना की यही स्थिति है। सरकार ने जो पहले गैस सिलिंडर दिया था, वह आज बेकार पड़ा है। पहली बार एलपीजी सिलेंडर बंटने के बाद उसे रिफिल कराने की कीमत ज्यादा है और गरीब परिवारों की इतनी हैसियत नहीं है कि 800-850 की कीमत पर गैस भरा सकें।
जानकारी के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में हर रोज 32 रुपये से कम यानी माह के 960 रुपये और शहरी इलाकों में हर रोज 47 रुपये यानी माह के 1410 रुपये से कम खर्च करने वाले भारतीय को गरीबी रेखा के नीचे माना जाता है। इसी सर्वे के मुताबिक, चंडीगढ़ में लगभग तीन लाख लोगों को गैस सिलिंडर देने की योजना बनाई गई थी लेकिन शहर के सैकड़ों गरीब परिवारों तक इस योजना का लाभ अभी नहीं पहुंचा है।
तीन को दिया गैस सिलिंडर का लाभ
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इस संदर्भ में कैपिटल गैस एजेंसी का कहना है कि उनके अंडर में केवल दरिया गांव आता है। उज्ज्वला गैस कनेक्शन के लिए भारी संख्या में लोगों के आवेदन मिले थे लेकिन जांच के बाद जिन परिवारों को योजना के लाभ के लिए उपयुक्त पाया गया, उन्हें कनेक्शन दे दिया गया। वहीं, दरिया गांव के प्रधान गुरप्रीत सिंह का कहना है कि आवेदकों की जांच में भारी लापरवाही की गई है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में पात्रों को लाभ नहीं मिल सका है। उन्होंने प्रशासन से दोबारा आवेदन पत्रों की जांच नए सिरे से कराने की मांग की है।
गरीबों को पीएम की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ गरीबों को नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते गांव में गरीब परिवारों को आज भी चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है। इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से भी की गई है।
-गुरप्रीत सिंह हैप्पी, सरपंच दरिया गांव
गांव में जोरशोर से उज्ज्वला योजना का लाभ देने के लिए सर्वे कराया गया था। लेकिन कंपनियों के द्वारा कैसे जांच की गई है। यह किसी के समझ में नहीं आ रहा है। गांव में गरीब सिलिंडर के इंतजार में हैं।
-कुलजीत सिंह संधू, सरपंच धनास गांव
सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को स्थानीय स्तर पर पलीता लगाया जा रहा है। गरीबों को उज्ज्ज्वला योजना के तहत सिलिंडर और चूल्हा देने के लिए गांव गांव में सर्वे तो हो गया है। लेकिन अभी तक पात्रों को लाभ नहीं मिल पाया है।
- हुकुम चंद, सरपंच, खुड्डा अलीशेर