गुड़गांव कमिश्नर पद से तबादले के बाद आईएएस प्रदीप कासनी वीरवार सुबह हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मिले।
उन्होंने मुख्यमंत्री से बवाल भूमि अधिग्रहण मामले में अवार्ड राशि पर अपनी सफाई देते हुए कहा कि उनका तबादला गलत तरीके से किया गया है। कासनी ने कहा है कि कार्रवाई से पहले उनका पक्ष लिया जाना चाहिए था।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद कासनी ने बताया कि बावल भूमि अधिग्रहण की अवार्ड राशि तय करने में उनका कोई रोल नहीं है। उन्होंने बताया कि दो दिसंबर को अवार्ड राशि तय करने के लिए जब कमेटी की बैठक हुई थी तो उन्होंने सिर्फ पिछली बैठक की प्रक्रिया को ही आगे बढ़ाया था। उन्होंने कहा कि उनकी ज्वाइनिंग से पहले के अधिकारियों ने अवार्ड राशि तय की थी। कासनी के अनुसार, इस गलती का पता चलने पर उन्होंने जिला उपायुक्तों को पत्र लिखकर अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे संबंधी सारी प्रक्रिया रोकने के निर्देश दे दिए थे।
कासनी से पहले डीपीएस नागल गुड़गांव के कमिश्नर थे, लेकिन कासनी ने व्यक्तिगत रूप से उनका नाम एक बार भी नहीं लिया। उन्होंने बताया कि अवार्ड से जुड़े हुए कुछ दस्तावेज उन्होंने मुख्यमंत्री को सौंपे है और कुछ दस्तावेज अगले कुछ दिनों में सौंप देंगे।
कासनी ने बताया कि अवार्ड तय करने के लिए उनकी ज्वाइनिंग के बाद दो बार कमेटी की बैठक हुई जिसे सरकार ने खारिज कर दिया था। उनका कहना है कि वह इस चक्कर में नहीं पड़ना चाहता कि किसने मेरे बारे में गलत जानकारियां दी हैं। कासनी का कहना है कि वह तो गुडगांव में आयुक्त के तौर पर काम करना चाहते है उन्होंने कहा कि न तो उन्होंने पिछली सरकार में कोई पोस्टिंग मांगी थी और न ही वर्तमान सरकार में कोई मांग की थी।
भूमाफिया पर जताया संदेह
कासनी ने अपने तबादले में भूमाफिया का हाथ होने पर भी संदेह जताया है लेकिन कासनी ने बताया कि हरसरू गांव में आठ एकड़ जमीन के फर्जीवाड़े को उजागर करने पर मुख्यमंत्री ने उन्हें शाबशी भी दी है। मालूम हो कि कासनी के तबादले के बाद यह चर्चा शुरू हो गई है कि भूमाफिया के दबाव में ही गुड़गांव मंडल आयुक्त का तबादला हुआ है क्योंकि कसानी की कार्रवाई से भूमाफियों और स्थानीय अधिकारियों की परेशानी बढ़ गई थी। कासनी का कहना है कि गुड़गांव के साथ साथ पूरे एनसीआर क्षेत्र में भूमाफिया सक्रिय है।
इसीलिए गई कासनी की कुर्सी
हरियाणा सरकार ने गत सोमवार को प्रदीप कासनी के गुड़गांव के आयुक्त पद से तबादले के आदेश जारी कर दिए थे लेकिन उन्हें अन्यत्र कहीं पोस्टिंग भी नहीं दी है। कासनी पर आरोप है कि उन्होंने बावल की 3600 एकड़ भूमि के अधिग्रहण पर जो मुआवजा राशि तय की, यदि सरकार उस पर अमल करती तो सरकार को 600 करोड़ का ज्यादा राशि का भुगतान किसानों को करना पड़ता। हालांकि सरकार ने इसके लिए दावा किया है कि उसने किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए अधिग्रहण खारिज किया है। गुड़गांव के आयुक्त पद के कासनी उस समय हटाए गए जब उन्हें इस पद पर तैनात हुए केवल 39 ही हुए थे। कासनी के पूरे कैरियर का यह 62वां तबादला रहा।