चंडीगढ़। कर्मचारियों ने बिजली विभाग के किए जा रहे निजीकरण के खिलाफ संघर्ष को तेज करने का फैसला किया है। इस संबंध में शीघ्र ही यूनियन की बैठक बुलाकर संघर्ष की रूपरेखा तय की जाएगी।
यूटी पावरमेन यूनियन द्वारा निजीकरण के खिलाफ लगातार रैलियां, धरने तथा प्रदर्शन किए जा रहे हैं। साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए चुने हुए प्रतिनिधियों, मोहल्ला समितियों व राजनीतिक पार्टियों को लगातार ज्ञापन दिए जा रहे हैं। यूनियन के महासचिव गोपाल दत्त जोशी ने आरोप लगाया कि विभाग के एसई बिना किसी संबंधित अथॉरिटी की इजाजत लिए बगैर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर नोडल अधिकारी नियुक्ति कर रहे हैं।
यूनियन के महासचिव गोपाल दत्त जोशी, कार्यकारी प्रधान ध्यान सिंह आदि पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार तथा चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर सीधे तौर पर विभाग का निजीकरण करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए निंदा की। नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने कोरोना महामारी की आड़ लेकर 17 अप्रैल 2020 को बिजली (अमेंडमेंट) बिल का ड्राफ्ट तैयार किया, उसमें केंद्र शासित प्रदेशों का जिक्र भी नहीं था।