अगर पंजाब के थर्मल प्लांट में कोयला नहीं भी पहुंचता तो परेशानी वाली बात नहीं है। डैम व सेंट्रल पूल से बिजली आपूर्ति जारी रहेगी। इस तरह पंजाब में बिजली का दारोमदार डैम के कंधों पर है। पंजाब को दो हजार मेगावाट बिजली सेंट्रल पूल से भी मिलती है। ऐसे में अभी गेहूं की बिजाई तक पंजाब को इतनी बिजली की जरूरत भी नहीं है, इसके लिए केंद्रीय संसाधन पर्याप्त हैं। सात हजार मेगावाट बिजली जहां डैम से मिल रही है, वहीं दो हजार मेगावाट सेंट्रल पूल से मिलनी शुरू हो चुकी है।
आपातकाल के लिए करनी होगे कोयले की व्यवस्था
हर साल पंजाब में थर्मल प्लांट सर्दी के मौसम में बंद कर दिए जाते हैं। सिर्फ मशीनरी ही चलाई जाती है, ताकि किसी आपातकालीन हालात में बिजली का उत्पादन किया जा सके। इसके लिए कोयले की व्यवस्था करनी होगी। पंजाब में सर्दी के मौसम में बिजली की खपत सात से नौ हजार मेगावाट होती है, इसलिए थर्मल प्लांट बंद कर दिए जाते हैं और बिजली का उत्पादन रोक दिया जाता है। अगर बिजली का उत्पादन करना भी हो तो अभी तलवंडी साबो व गोइंदवाल साहिब की मशीनरी को चलाकर रखा गया है। कोयला मिलते ही 24 घंटे में बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा।
अगले माह दो हजार मेगा यूनिट कम हो सकती है खपत
वर्तमान में सूबे में बिजली की मांग 9000 मेगावाट है। पंजाब 7000 मेगावाट अपने संसाधनों, साझा जलविद्युत से, 2000 मेगावाट सेंट्रल पूल से खरीद रहा है। सरप्लस बिजली एनपीई में पंजाब कभी भी ले सकता है। हालांकि पावरकॉम के सीएमडी ने राज्य सरकार से 200 करोड़ रुपये बिजली खरीद के लिए अतिरिक्त मांगे हैं, ताकि संकट का सामना न करना पड़े।
संभावना व्यक्त की जा रही है कि अगले दो माह में लगातार दो हजार मेगावाट प्रतिदिन बिजली की खपत कम हो सकती है। इसका मुख्य कारण सर्दी का बढ़ना होगा। फिर भी पंजाब सरकार कोई रिस्क लेने के लिए तैयार नहीं है। संकट के लिए केंद्रीय पूल से बिजली खरीद को सुनिश्चित करना चाहती है।