हरियाणा के मानवाधिकार आयोग में पिछले साल सितंबर से किसी भी केस की सुनवाई नहीं हुई है। मानवाधिकार हनन के पीड़ितों को सिर्फ तारीखें ही मिल रही हैं। पुराने केस तो लटके ही हैं। नए केसों की फाइलें भी लंबी होती जा रही हैं।
दरअसल, आयोग के पास न तो चेयरमैन और न ही सदस्य हैं। बीते साल सितंबर के बाद से मानवाधिकार आयोग में किसी केस की सुनवाई नहीं हुई है। नियुक्ति का विज्ञापन देने के बावजूद अब तक राज्य सरकार ने चेयरमैन और सदस्य की नियुक्ति नहीं की है। बताया जा रहा है कि विज्ञापन के बाद आवेदन भी आए।
सरकार की ओर से बनाई गई अधिकारियों की एक कमेटी ने आवेदनों की जांच कर फाइल आगे भी बढ़ाई, मगर बात आगे नहीं बढ़ पाई। आयोग के पास करीब दो हजार पुरानी शिकायतें लंबित हैं। वहीं, छह महीने में करीब चार हजार नई शिकायतें भी आई हैं। इन केसों की भी फाइल आगे नहीं बढ़ पाई।
हरियाणा मानवाधिकार आयोग में एक चेयरमैन और दो सदस्यों की जगह है। आयोग के चेयरमैन जस्टिस एके मित्तल का कार्यकाल बीते साल अप्रैल में पूरा हो गया था। उसके बाद उनका चार्ज आयोग के ही सदस्य दीप भाटिया को सौंपा गया। कार्यवाहक चेयरमैन के तौर पर वह ही आयोग का कामकाज देख रहे थे। इस दौरान आयोग के दूसरे सदस्य केसी पुरी का भी कार्यकाल पूरा हो गया और वह आयोग से चले गए।
आयोग में सिर्फ दीप भाटिया ही बचे और किसी तरह से उन्होंने सितंबर तक आयोग का काम देखा और कई केसों का निपटारा भी किया। इस दौरान दीप भाटिया का भी कार्यकाल पूरा हो गया। उसके बाद से आयोग में किसी सदस्य की नियुक्ति नहीं हुई है।
नियुक्ति में आचार संहिता की बाधा नहीं
हाईकोर्ट के एडवोकेट व चुनाव से संबंधित कानून के जानकार हेमंत कुमार ने बताया कि यह सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह आयोग के चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति करे। लोगों को परेशानी न उठानी पड़े। इनकी नियुक्ति में आचार संहिता की कोई बाधा नहीं है। पूर्व में कई बार अदालतें फैसला दे चुकी हैं कि आचार संहिता की वजह से ढाई महीने प्रशासनिक कामकाज ठप नहीं रह सकते। चुनाव आयोग से मंजूरी लेकर नियुक्तियां की जा सकती हैं। केरल सरकार ने आचार संहिता लागू होने के बाद चुनाव आयोग से मंजूरी लेकर चेयरमैन की नियुक्ति की है।
पैनल करता है नियुक्ति
आयोग में चेयरमैन और सदस्य की नियुक्ति पैनल करता है। पैनल में हरियाणा के सीएम, विधानसभा स्पीकर, गृहमंत्री और नेता प्रतिपक्ष शामिल हैं। सीएम के पास ही गृहमंत्री का चार्ज है। इसलिए पैनल में तीन सदस्य ही शामिल होंगे। आयोग का चेयरमैन रिटायर्ड चीफ जस्टिस या हाईकोर्ट के जज हो सकते हैं। एक सदस्य हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज या जिला सेशन के रिटायर्ड जज (सात-सात का अनुभव) हो सकते हैं, जबकि दूसरे सदस्य कोई ऐसा व्यक्ति, जिसके पास मानवाधिकार का व्यावहारिक अनुभव और ज्ञान हो।
यह सरकार जनहित की नहीं है। सरकार ने एक भी फैसला जनहित का नहीं किया है। यह सरकार की नाकामी है कि इतने महीने बीतने के बावजूद आयोग में चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति नहीं हुई है।
-भूपेंद्र सिंह हुड्डा, नेता प्रतिपक्ष।
पूर्व सीएम मनोहर लाल व सीएम नायब सिंह सैनी अंतिम व्यक्ति में खड़े व्यक्ति का दर्द समझते हैं। उनकी हर समस्याओं का समाधान उनकी पहली प्राथमिकता है। मानवाधिकार आयोग में नियुक्तियों को लेकर सरकार गंभीर है। आचार संहिता की वजह से नियुक्तियों में कुछ समय लग सकता है।
- सुदेश कटारिया, चीफ मीडिया कोऑर्डिनेटर, सीएम हरियाणा।