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Chandigarh News: 15 साल से नहीं मिला प्लॉट का कब्जा, रेरा ने पीडीए और ओमैक्स को ठहराया जिम्मेदार

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प्राधिकरण ने दोनों संस्थाओं को 10.80 फीसदी सालाना ब्याज के साथ बकाया भुगतान करने का दिया आदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। पंजाब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने 15 साल से प्लॉट का कब्जा न मिलने के मामले में पटियाला अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीडीए) और ओमैक्स लिमिटेड को जिम्मेदार ठहराया है। प्राधिकरण ने दोनों संस्थाओं को 10.80 फीसदी सालाना ब्याज के साथ बकाया भुगतान करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने के बाद प्लॉट का कब्जा देने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह मामला 200 वर्ग गज के प्लॉट नंबर जी-88 से जुड़ा है, जिसे वर्ष 2008 में अशोक डावरा को आवंटित किया गया था। बाद में 20 मई 2014 को यह प्लॉट शिकायतकर्ता के नाम ट्रांसफर कर दिया गया। आवंटन पत्र के अनुसार, प्लॉट का कब्जा 24 जनवरी 2010 तक मिल जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शिकायतकर्ता ने रेरा में दिसंबर 2025 में शिकायत दर्ज कर कब्जा और जमा राशि पर ब्याज की मांग की थी। प्लॉट की कुल कीमत 11 लाख रुपये थी, जबकि शिकायतकर्ता अब तक करीब 21.07 लाख रुपये जमा कर चुका है। पीडीए ने देरी के लिए ओमैक्स को जिम्मेदार ठहराया, जबकि ओमैक्स ने परियोजना के विकास में विवादों को कारण बताया। पीडीए के अनुसार, 16 नवंबर 2006 को संयुक्त विकास समझौता हुआ था। रेरा ने स्पष्ट किया कि पीडीए और ओमैक्स के आपसी विवाद का खामियाजा आवंटी को नहीं भुगतना पड़ सकता। प्राधिकरण ने यह भी कहा कि परियोजना का पंजीकरण न होना भी जवाबदेही से बचने का आधार नहीं है।
ब्याज भुगतान और कब्जे के निर्देश
रेरा ने 11.22 लाख रुपये की राशि पर 10.80 फीसदी सालाना की दर से ब्याज देने का आदेश दिया है। इसमें मूल 11 लाख रुपये के अलावा संबंधित भुगतान भी शामिल हैं। आदेश के अनुसार, ब्याज की गणना ट्रांसफर की तारीख 25 मई 2014 से की जाएगी। बाद में जमा की गई राशि पर संबंधित भुगतान की तारीख से ब्याज की गणना होगी। इसके अतिरिक्त, 18.92 लाख रुपये पर भी आदेश की तारीख से वास्तविक कब्जा मिलने तक 10.80 फीसदी सालाना दंडात्मक ब्याज मिलेगा।
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90 दिन में अनुपालन का आदेश
रेरा ने पीडीए और ओमैक्स को आदेश की प्रति मिलने के 90 दिन के भीतर निर्धारित ब्याज राशि जारी करने को कहा है। उन्हें अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल करनी होगी। पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त होने के बाद आवंटी को लिखित रूप से कब्जे का ऑफर देना अनिवार्य है। आवंटी से वसूला गया अधिक ब्याज उसके खाते में समायोजित होगा। रेरा ने चेतावनी दी है कि आदेश की अवहेलना पर रेरा अधिनियम की धारा 63 के तहत कार्रवाई और जुर्माना लगाया जा सकता है।
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