कैथल। प्रतिबंध के बावजूद जिले भर में पॉलीथिन का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। शुरुआती दिनाें में नपा अधिकरियाें ने कई जगह पर छापेमारी की, लेकिन समय के साथ-साथ यह मुहिम ठंडी पड़ती चली गई। खामियाजा अब शहर में लोगों को ही भुगतना पड़ रहा है। वहीं सीवरेज आदि रुकने के कारण भी समस्या हो जाती है। इसके अलावा पशु पॉलीथीन को खा जाते हैं। जिससे वे भी बीमार हो रहे हैं।
दुकानों और रेहड़ी फड़ी पर हो रहा प्रयोग
दुकानदार, फड़ी, रेहड़ी संचालक सहित बड़े प्रतिष्ठानों में भी पॉलीथीन का प्रयोग हो रहा है। जबकि इसके प्रयोग होने से जहां पर्यावरण संरक्षण पर असर हो रहा है। शोषित समाज हरियाणा के शहरी प्रधान संजय रबारी, जन जागृति मंच के जिला सचिव नरेश कुमार, संगठन सचिव एडवोकेट दीपक टांक, जजम के मुख्य सलाहकार कमल बौद्ध, सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप क्योड़क ने बताया कि पॉलीथिन की थैलियां हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
इसके प्रयोग से हमें बचना चाहिए। पॉलीथिन की थैलियां नालियाें व सीवरेज में फंस कर उन्हें जाम कर देती हैं। थैलियों को खाकर गायें दम तोड़ रही हैं। लोग सब्जी व अन्य खाने का सामन ले जाने में प्लास्टिक की थैलियों का इस्तेमाल करते है। जो अंजानें में ही अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। पहले दुकानदारों ने चालान के भय से पॉलीथिन बैग का इस्तेमाल बंद कर दिया, लेकिन प्रशासन के सुस्त पड़ते ही फिर से पॉलीथिन बैग का इस्तेमाल शुरू हो गया।
ये हैं हानियां
पॉलीथिन को नष्ट नहीं किया जा सकता। जला कर नष्ट करने से विषैली गैस निकलती है, जिससे प्रदूषण फैलता है। खेतों की उर्वरक कम होती है। वैसे पॉलीथिन बैग के इस्तेमाल व विक्रय पर रोक लगाई गई है, लेकिन आज भी इसका प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। सामाजिक संस्थाआें को आगे आना चाहिए। सभी स्कूलाें व कॉलेजाें में पॉलीथिन बैग से होने वाली हानियाें के बारे छात्र-छात्राआें को जागरूक किया जाना चाहिए। हर व्यक्ति को पॉलीथिन के उपयोग से परहेज करना चाहिए।
डा. कृष्ण लाल सतीजा एमबीबीएस के अनुसार स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि प्लास्टिक की बनी थैलियाें में अनेक हानिकारक रंग, रंजक व अकार्बनिक रसायन होते हैं। इनमें से कुछ रसायन कैंसर जैसी बीमारी को जन्म दे सकते हैं और रंजक पदार्थों में केडमियम जैसी धातुएं होती है जो स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक हैं। उन्हाेंने बताया कि जब गाय इसे खाती है तो यह हजम नहीं होता है आंतों में सुजन आ जाती है, जिस कारण उनकी मौत हो जाती है।
क्या कहता है कानून
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने प्लास्टिक अपशिष्ट नियम 2011 के तहत पॉलीथिन बैग के निर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्र ी और उपयोग पर रोक लगाई गई है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड से प्राप्त सूचना के अनुसार हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश व अन्य राज्याें में प्लास्टिक बैग्स पर पूर्ण प्रतिबंध है।