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Chandigarh: 2027 तक प्रदूषण मुक्त चंडीगढ़ का लक्ष्य, डीजल नहीं, चलेंगी सिर्फ इलेक्ट्रिक ऑटो-बस

Wed, 20 Jul 2022 03:59 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सीटीयू ने डीजल वाली बसों को बदलने की प्रक्रिया शुरू भी कर दी है। पिछले वर्ष सीटीयू ने 40 ई-बसें चलाईं और अगले महीने के अंत तक नई 40 बसें सीटीयू के बेड़े में शामिल हो जाएंगी। शहर के लोगों को ई-बसें काफी पसंद भी आ रही हैं।
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इलेक्ट्रिक बस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बढ़ता ट्रैफिक और उसकी वजह से हो रहा प्रदूषण, शहर की सबसे बड़ी चुनौती है। प्रशासन के अधिकारी भी इस समस्या की गंभीरता को समझते हैं इसलिए अब इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जा रही हैं। जो सीटीयू की डीजल बसे हैं उन्हें भी वर्ष 2027-28 तक इलेक्ट्रिक में बदलने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी भी सिर्फ इलेक्ट्रिक ऑटो को ही परमिट दे रहा है।

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प्रशासन की कोशिश है कि सीटीयू के बेड़े में ट्राइसिटी रूट पर चल रहीं सभी बसों को इलेक्ट्रिक बस में बदल दिया जाएगा। अभी सीटीयू के पास 358 डीजल बसें हैं जो काफी ज्यादा कार्बन उत्सर्जित करती हैं। शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिले, इसके लिए प्रशासन एक इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति भी बना रहा है। इसके लिए कई दौर की बैठक हो चुकी हैं और जल्द ही इसे जारी करने की तैयारी है। 

शहर में प्रदूषण मुक्त ई-वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में भी प्रशासन ने पहला कदम उठा लिया है। एसटीए की तरफ से अब सिर्फ ई-रिक्शा और ई-ऑटो को ही पंजीकृत किया जा रहा है और सवारियों को ढोने के लिए परमिट दिए जा रहे हैं। एलपीजी और सीएनजी ऑटो को अब नया परमिट नहीं दिया जा रहा है। साथ ही शहर में चल रहे करीब 6000 सीएनसी-एलपीजी ऑटो को भी धीरे-धीरे ई-रिक्शा और ई-ऑटो से बदलने की तैयारी है। एक सम्मेलन में प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने ये भी संकेत दिए थे कि प्रशासन आने वाले कुछ सालों में सिर्फ इलेक्ट्रिक गाड़ियों के ही पंजीकरण की मंजूरी दे सकता है।

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अगले महीने सीटीयू को मिल जाएगी 40 नई इलेक्ट्रिक बसें
सीटीयू ने डीजल वाली बसों को बदलने की प्रक्रिया शुरू भी कर दी है। पिछले वर्ष सीटीयू ने 40 ई-बसें चलाईं और अगले महीने के अंत तक नई 40 बसें सीटीयू के बेड़े में शामिल हो जाएंगी। शहर के लोगों को ई-बसें काफी पसंद भी आ रही हैं। वर्तमान में जो ई-बसें चल रही हैं उसके लिए सीटीयू ने अशोक लेलैंड के साथ 10 साल का करार किया है। अगले महीने तक जो 40 बसें आएंगी उसके लिए सीटीयू ने वॉल्वो और आयशर के साथ समझौता किया है। 

मोबिलिटी प्लान के लिए राइट्स कर रहा सर्वे
ट्राइसिटी में बढ़ते ट्रैफिक पर लगाम लगाने के लिए यूटी प्रशासन व्यापक मोबिलिटी प्लान तैयार कर रहा है। इसके लिए पिछले कई महीनों से रेल इंडिया तकनीकी और आर्थिक सेवा (राइट्स) कंपनी ट्राइसिटी में सर्वे कर रही है। अब तक दो स्टडी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जा चुकी है। इसमें कंपनी ने विभिन्न रास्तों पर गाड़ियों की संख्या, पार्किंग व्यवस्था, ट्रैफिक जाम को कम करने के सुझाव, बस, रेलवे व एयरपोर्ट की स्थिति के बारे में जानकारी दी है। कंपनी की तरफ से कई शॉर्ट, मीडियम और लांग टर्म सुझाव भी दिए गए हैं। आखिरी रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन तय करेगा कि शहर के लिए मेट्रो ठीक है, मोनोरेल या कुछ और। 

एयरपोर्ट के यात्रियों के लिए लिए एसी शटल बस सर्विस
22 मार्च को परिवहन विभाग ने इंटरनेशनल एयरपोर्ट से आईएसबीटी-17 और आईएसबीटी-43 के लिए शटल एसी बस सर्विस शुरू की। अब एयरपोर्ट पर उतरने वाली हर फ्लाइट के समय पर एयरपोर्ट के बाहर सीटीयू की बस खड़ी रहती है। इससे पैसेंजर महंगी कैब सर्विस के बजाय सस्ती बस सर्विस ले सकते हैं। 

प्रति व्यक्ति 100 रुपये का फ्लैट टिकट रखा गया है। एयरपोर्ट पर एक सीटीयू सेवा काउंटर भी स्थापित किया गया है जहां से लोग मदद ले सकते हैं। इसके अलावा आईएसबीटी-43 से पीजीआई तक के लिए एक एक्सप्रेस रूट की शुरुआत की गई है। दावा है कि इस रूट पर हर 10 मिनट में बस मिलती है। 

खाटू श्याम जी, सालासर बालाजी और जयपुर के लिए सीधी एसी बस
सीटीयू ने बीते महीने कई ऐसे रूट पर बसें शुरू की जो पिछले कई वर्षों से बंद पड़े थे। इनमें खाटू श्याम जी, सालासर बालाजी और जयपुर के लिए एसी बस और टनकपुर के लिए नॉन एसी बस सेवा शामिल हैं। आईएसबीटी-17 से खाटू श्याम जी के लिए सुबह 7:00 बजे और सालासर धाम के लिए सुबह 7:40 बजे से बस चलेगी। इसके अलावा तलवाड़ा, ज्वाला जी, अमृतसर, बैजनाथ, नंगल और दिल्ली के कुछ रूटों पर भी बस सेवा शुरू की है। सब अर्बन रूट में खिजराबाद, रोपड़, बद्दी, नालागढ़, ताजपुरा, बस्सी पठाना, नंदपुर, मोरिंडा समेत कई रूटों पर भी बसें चलने लगी है। 
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स्वास्थ्य सेवाओं का किया जा रहा विस्तार
चंडीगढ़ वाकई सिटी ब्यूटीफुल है। मेरी कोशिश है कि शहर को प्रदूषण मुक्त बनाने वाली योजनाओं को धरातल पर उतारूं। जनता से जुड़ी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों को दिलाने का प्रयास है। स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में चंडीगढ़ बेहतर स्थिति में है। अब इन सेवाओं का और विस्तार किया जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भी चंडीगढ़ बहुत आगे है। - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक।

पेरीफेरी में तेजी से बढ़ रही आबादी, योजना उसी के अनुसार बने
चंडीगढ़ देश का पहला योजनाबद्ध शहर है। खूबसूरती के मामले में इस शहर की तुलना विदेश के शहरों से की जाती है। ये शहर पांच लाख की आबादी के लिए बसाया गया था, अब 13 लाख के करीब हो गई है। पेरीफेरी में तेजी से आबादी बढ़ रही है। इसलिए इसे ध्यान में रखते हुए भविष्य की योजना बनानी चाहिए। समय आ गया है कि चंडीगढ़ की अपनी विधानसभा भी हो, ताकि लोगों के काम जल्द हो सकें। - अरुण सूद, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
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