बीते साल के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि एमएसपी से पंजाब को 3626 करोड़ रुपये रेवन्यू आया और मंडी बोर्ड को 1813 करोड़ रुपये मार्केट फीस पर 1813 करोड़ रुपये आरडीएफ आया जोकि अब खत्म हो जाएगा। इसका असर पंजाब पर सबसे ज्यादा होगा।
सूबे में 36 हजार आढ़ती हैं जो पूरी तरह अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं और पिछले साल उन्हें 1611 करोड़ रुपये और मजदूरों को 1100 करोड़ रुपये की आमदन हुई थी। लाल सिंह ने कहा कि भाजपा के वन नेशन वन मार्केट के तहत बीते कुछ सालों में पंजाब सरकार द्वारा 163 प्रमुख यार्डों, 284 सब यार्डों और 1443 खरीद केंद्रों में करोड़ों रुपये का जो निवेश किया गया है, वह बेकार चला जाएगा।
पंजाब के आर्थिक ढांचे को तबाह कर देंगे तीनों अध्यादेश: मान
आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद भगवंत मान ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि संबंधी तीनों अध्यादेशों को पंजाब के आर्थिक ढांचे को बर्बाद करने वाला तानाशाही फैसला करार दिया है। मान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तीनों अध्यादेश वापस लेने की मांग की है। इसके साथ ही मान ने केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल समेत बादल परिवार पर मंत्री पद की खातिर पंजाब और किसान के हित मोदी सरकार के पास गिरवी रखने का आरोप लगाया है।
खेती आर्डिनेंस से किसानी की तबाही होगी: ढींढसा
न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को देश की आर्थिकता पर बोझ बताने वाले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बयान पर सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने कड़ा एतराज जताया है। वाजपेयी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे ढींढसा ने केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में पूर्व केंद्रीय मंत्री ढींढसा ने कहा कि जब केंद्रीय कैबिनेट में खेती आर्डिनेंस (अध्यादेश) लाया गया तब केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल को तुरंत इसका विरोध कर मंत्री पद से त्यागपत्र देना चाहिए था।
उन्होंने कहा किसानों को बर्बादी की तरफ धकेलने वाले इस आर्डिनेंस का समर्थन कैसे किया जा सकता है। सांसद ढींढसा ने कहा कि हरित क्रांति लाने में पंजाब व हरियाणा के किसानों की कड़ी मेहनत को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। हरित क्रांति से पहले अनाज के लिए बाहरी देशों के आगे हाथ फैलाने पड़ते थे। उन्होंने कहा पंजाब व हरियाणा के किसानों ने देश को आत्मनिर्भर बनाया।