उन्होंने कहा कि इसी तरह एक समय में केंद्र और दोनों राज्यों में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों ने शासन किया लेकिन उन्होंने भी एसवाईएल मुद्दे का समाधान नहीं किया। उनके लिए एसवाईएल का मुद्दा सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा है और वे इस पर सिर्फ राजनीति करते हैं लेकिन ऐसे मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। जब आप उनसे (भाजपा, कांग्रेस) पंजाब में पूछेंगे तो वे कुछ और कहेंगे और हरियाणा में कुछ और। पाठक इस समय हरियाणा के तीन दिवसीय दौरे पर हैं।
एसवाईएल विवाद: पहले जाखड़ भाजपा छोड़ कांग्रेस में जाने वालों को मनाएं
उधर, सीएम भगवंत मान ने एक बार फिर विपक्षी दलों को निशाने पर लिया। सुखबीर बादल व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ पर तंज कसा और कहा कि ये दोनों ही नेता विधानसभा में हैं नहीं, तो विधानसभा में बहस करने का कोई फायदा नहीं है। वहीं एक नवंबर को होने वाली बहस पर सुखबीर बादल और सुनील जाखड़ के रुख पर मान ने कहा कि विरोधी अब बहस में शामिल न होने के बहाने ढूंढ रहे हैं। सीएम मान ने जाखड़ की उस बात पर भी पलटवार किया, जिसमें उन्होंने बहस के लिए पैनल बैठाने का सुझाव दिया था। मुख्यमंत्री ने जाखड़ को सुझाव दिया कि भाजपा छोड़ कांग्रेस में जाने वालों को पहले जाकर मनाएं।
पाठक पंजाब के अधिकारों की रक्षा करने में असफल रहे: बाजवा
पंजाब के नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि पाठक पंजाब के राज्यसभा सदस्य हैं। वह हरियाणा में एक टीवी इंटरव्यू में पंजाब के पानी के अधिकारों की रक्षा करने में बुरी तरह असफल रहे हैं। वह राइपेरियन कानूनों के अनुसार नदियों के पानी पर पंजाब के विशेष अधिकारों का दावा करने में अफसल रहे हैं। इस मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को अपना स्टैंड साफ करना चाहिए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में उचित तरीके से सरकार अपना पक्ष नहीं रख पाई है।
शिअद ने पूछा- पाठक पर क्या कार्रवाई करेंगे मान
शिअद के सीनियर नेता दलजीत सिंह चीमा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि क्या वह सांसद संदीप पाठक के इस रुख के साथ हैं कि हरियाणा को सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर से पानी मिलना चाहिए। यदि नहीं, तो वे उसके खिलाफ क्या कार्रवाई करेंगे। मुख्यमंत्री एक नवंबर को एसवाईएल नहर पर बहस कराना चाहते हैं लेकिन उनकी अपनी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में राज्य के मामले पर समझौता कर लिया है।
पंजाब से एक आप पार्टी के सांसद हरियाणा को पानी देने के समर्थन में हैं और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बरकरार रख रहे हैं। मुख्यमंत्री को तुरंत संदीप पाठक का इस्तीफा मांगना चाहिए। यदि वे तत्काल ये दो काम नहीं करते हैं तो नि:संदेह यह साबित हो जाएगा कि भगवंत मान पंजाब की नदियों का पानी हरियाणा को सौंपने की साजिश का हिस्सा हैं और वह इस सबसे संवेदनशील मुददे पर पंजाबियों को गुमराह करने के लिए बहस की नौटंकी कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे सर्वेक्षण के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने चार अक्टूबर को केंद्र से कहा था कि वह पंजाब में जमीन के उस हिस्से का सर्वेक्षण करे जो राज्य में एसवाईएल नहर के हिस्से के निर्माण के लिए आवंटित किया गया था और वहां किए गए निर्माण की सीमा का अनुमान लगाए।
राज्यपाल केंद्र सरकार को लिखें पत्र
राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के पत्र पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा है कि वह पहले दिन से इस मुद्दे को उठा रहे हैं लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। शुक्र है राज्यपाल ने अब इस मामले को लेकर पत्र लिखकर जवाब तलब किया है। उनकी राज्यपाल से विनती है कि पंजाब सरकार के अलावा केंद्र सरकार को भी पंजाब से जुडे मुद्दों पर पत्र लिखें कि वह चंडीगढ़ में हरियाणा की विधानसभा को जमीन नहीं देंगे। केंद्र सरकार ने सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) मुद्दे पर जो सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा है, उसे वापस ले। साथ ही इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाएं। कस्टोडियन के रूप में साफ करें कि पंजाब के पास किसी भी राज्य को पानी देने के लिए नहीं है। बीबीएमबी में दूसरे राज्य के चेयरमैन के मामले को भी उठाएं।