चंडीगढ़। भगवान महावीर ने तपस्या कर ज्ञान प्राप्त की, तभी उपदेश देना शुरू किया। उन्होंने स्वयं को उसके अनुरूप बनाया। हम राजनेता आत्मा से नहीं वाणी से भाषण देते हैं। पांच महाव्रत का पालन करना कोई तमाशा नहीं है। यह बात पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व नवाहिक कार्यक्रम के पहले दिन सेक्टर-24 के अणुव्रत के बाहर आयोजित कार्यक्रम में कही।
उन्होंने कहा कि आज पंजाब के चारों समाज एक ही मंच पर एकत्रित कर तेरापंथी सभा और अणुव्रत समिति ने एक नई सोच व एक मंच तैयार किया है, बहुत खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि वह इस कार्यक्रम में आकर खुशनसीब समझ रहे हैं जो मनीषी संत का सानिध्य मिल रहा है। मेवाड़ और उदयपुर में भी मुनिश्री का सानिध्य प्राप्त हुआ।
उन्होंने कहा कि हमारा छोटा सा समाज कई टुकड़ों में बंटा है, यह अच्छा नहीं है। श्रावक ही अपने गुरुओं को तैयार करता है। जैन धर्म ऐसा धर्म है जो अंदर देखने को कहता है। स्वयं पर अनुशासन जरूरी है। जब तक व्यक्ति ठीक नहीं होगा तब तक समाज और देश ठीक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन में चमत्कार है। करोड़ का पैकेज वाले भी सबकुछ छोड़कर निकल जा रहे हैं क्योंकि जीवन का उद्धार किस प्रकार करें। भगवान महावीर ने कष्टों को साधने का काम किया। कष्टों को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि जितने भी तीर्थकर बने सभी राजाओं के घरों से थे। इसका मतलब यह है कि सबकुछ है, वह सबकुछ छोड़ देता है तो उसे सिद्धि प्राप्त होती है।
उन्होने कहा कि क्षमा याचना हम करते हैं। ऊपर से क्षमा याचना का कोई अर्थ नहीं है। क्षमायाचना कर लेने पर सबकुछ सुलझ जाएगा। कटारिया ने मनीषी संत विनय कुमार आलोक और अभय मुनि को पावर हाउस कहा। उन्होंने उपस्थित लोगों को कहा कि पावर हाउस से जुड़े रहोगे तो ठीक रहोगे। उन्होंने नशा से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि त्याग व्यक्ति को मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि जैसा अन्न खाओगे वैस मन होगा।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गान और प्रज्ञा जैन द्वारा महामहिम व उनकी पत्नी अनीता जैन के अभिनंदन के लिए मनीषीसंत के द्वारा लिखे गीत प्रस्तुत की। इस मौके पर सेक्टर-18 के अखिल भारतीय जैन कॉफ्रेंस के महामंत्री मुकेश जैन, श्वेतांबर मूर्तिपूजक समाज के सुशील जैन, तेरापंथी महासभा के पंजाब प्रभारी कुलदीप सुराणा ने विचार रखे। कार्यक्रम का संयोजन अणुव्रत समिति के अध्यक्ष मनोज जैन ने किया।
जीवन ही नहीं मरने की भी कला जैन धर्म सिखाता है
इस मौके पर मनीषी संत मुनिश्री विनय कुमार आलोक ने कहा कि जैन धर्म जीवन जीने की कला ही नहीं मरने की कला भी सिखाता है। उन्होंने लोगों से कहा कि जीवन को सकारात्मक बनाने का कार्य करें। उन्होंने कहा कि जैन धर्म के अनुयायियों के लिए पर्युषण पर्व विशेष महत्व रखता है। पर्युषण महापर्व मात्र जैनों का पर्व नहीं है, यह एक सार्वभौम पर्व है।