चंडीगढ़। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 45 वर्ष पुराने एक मामले में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को सेवा में कोताही बरतने का आरोपी करार दिया है। आयोग ने डीडीए को 99 हजार रुपये का हर्जाना शिकायतकर्ता को देने का निर्देश दिया। साथ ही मानसिक उत्पीड़न के लिए 75 हजार व केस खर्च के रूप में 25 हजार रुपये देने के निर्देश दिया। सेक्टर-39 निवासी विद्या शंकर पांडे ने आयोग को दी शिकायत में बताया कि दिल्ली विकास प्राधिकरण की वर्ष 1979 में आई नई पैटर्न आवास योजना में एक फ्लैट लेने के लिए 4500 की रुपये की राशि का भुगतान किया था, जिसके बाद उन्हें आवंटन पत्र जारी किया गया था। बकाया राशि का भुगतान दिसंबर 2001 तक करना था। विद्या शंकर पांडे ने भुगतान के लिए आईडीबीआई बैंक 7.58 लाख रुपये लोन लिया था। वर्ष 2006 में दिल्ली विकास प्राधिकरण ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर कहा कि वह डीडीए फ्लैट के आवंटन के लिए पात्र नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने डीडीए को पैसा लौटाने के लिए वर्ष 2015 में आवेदन दिया। वर्ष 2017 में प्रतिवादी की ओर से 7.63 लाख रुपये की राशि लौटा दी गई लेकिन इतनी लंबी अवधि के लिए उक्त राशि पर कोई ब्याज नहीं दिया गया। मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अपना फैसला सुनाया।