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Chandigarh News: होम लोन के साथ जबरन पाॅलिसी बेची, बाद में पॉलिसी रद्द न करना बैंक को पड़ा महंगा

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चंडीगढ़। होम लोन के साथ जबरन बीमा पॉलिसी बेचने के बाद कई दिन तक दस्तावेज न देना और बाद में बीमा पॉलिसी रद्द न करना पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड को महंगा पड़ गया। इस पर दंपती शिकायतकर्ताओं ने उपभोक्ता में केस दायर किया। आयोग ने कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया और उपभोक्ता आयोग की बीमा की राशि 38 हजार रुपये 9 प्रतिशत ब्याज और 20 हजार रुपये मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया।
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शिकायतकर्ता हमेश कुमार और उनकी पत्नी रामनदीप निवासी जालंधर ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया कि उन्होंने पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से घर खरीदने के लिए लोन लिया था। उन्हें लोन के साथ बीमा पॉलिसी लेने के लिए मजबूर किया गया जिस पर उन्होंने पॉलिसी ले ली लेकिन पॉलिसी दस्तावेज़ समय पर नहीं दिए गए। जब काफी समय के बाद पॉलिसी दस्तावेज साझा किए गए तो शिकायतकर्ताओं को महसूस हुआ कि पॉलिसी उनके लोन सुरक्षा के उद्देश्य को पूरा नहीं करती थी। क्योंकि पॉलिसी के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई थी और समय पर दस्तावेज़ नहीं भेजे गए थे। पॉलिसी केवल तीन साल के लिए दुर्घटना कवर करती थी जबकि लोन 20 साल का था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने पॉलिसी रद्द करने की मांग की जिस पर पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड ने जवाब नहीं दिया। इस पर शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग का का रुख किया।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने माना कि बीमा कंपनियों ने आईआरडीएआई के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया और पॉलिसी दस्तावेज़ बहुत देरी से भेजे गए। वहीं, आयोग द्वारा आदेश में कहा गया कि शिकायतकर्ता को बीमा पॉलिसी की समीक्षा करने का पूरा अधिकार है और अब उन्हें 15 दिन के भीतर पॉलिसी रद्द करने का अधिकार प्राप्त है। इसके साथ ही कंपनी को शिकायतकर्ताओं को 38 हजार रुपए का रिफंड और 20 हजार का मुआवजा देना होगा।
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