रिश्तों में राजनीति और राजनीति में रिश्तों का होना घातक है। असल में राजनीति में मानवीय मूल्यों की कोई जगह नहीं होती है। कुछ ऐसा ही संदेश टैगोर थिएटर में चल रहे विंटर फेस्टिवल के चौथे दिन नाटक ‘दिल्ली रोड ते इक्क हादसा’ में देखने को मिला।
इस नाटक में चंडीगढ़ के थिएटर ग्रुप ऑफ स्टेज क्रिएशंस के 12 कलाकारों ने मंचन किया। डेढ़ घंटे की अवधि वाले इस नाटक का निर्देशन पाली भूपिंदर सिंह ने किया। नाटक के बारे में उन्होंने बताया कि इसे लिखने में उन्हें चार साल लग गए।
उन्होंने बताया कि इस नाटक की स्क्रिप्ट एक्सपेरिमेंटल है। पहले इसे सोलो खेला गया था, अब इसे ग्रुप में खेला गया है। दरअसल, यह नाटक उन राजनेताओं पर व्यंग्य करता है जो सत्ता की लालसा में मानवीय जीवन को दांव पर लगाने से भी नहीं हिचकिचाते हैं।
नाटक की कहानी सीमा नाम की औरत के इर्द-गिर्द घूमती है।
नाटक मंचन
- फोटो : अमर उजाला
नाटक की खासियत इसकी स्क्रिप्ट थी, जिसमें साहित्यिक शब्दावली का बखूबी इस्तेमाल किया गया। नाटक के लंबे डायलॉगों से यह भी पता चल रहा था कि नाटक में अनुभवी कलाकारों ने अपनी-अपनी भूमिका शानदार तरीके से निभाई है।
नाटक की कहानी सीमा नाम की औरत के इर्द-गिर्द घूमती है। उसके पति के दुश्मन उसे किडनैप कर लेते हैं। सीमा अपने परिवार के खिलाफ होती है, जिसकी सास सत्ता के लालच में अपने ही पति को हत्या करवा देती है।
सीमा का अपने परिवार के प्रति विद्रोही होना उसकी सास को रास नहीं आता है और वह उसे भी मरवा देती है। इस तरह सत्ता की लालसा में उसकी सास पहले अपने पति की और बाद बहू की बलि ले लेती है। नाटक में मनदीप, अंजली, सैम गुरविंदर, रामेश, नटवर, संदीप, आंचल और विशाल ने शानदार एक्टिंग की।