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Chandigarh News: पूर्व एसएसपी के आदेश भूले पुलिसकर्मी, लावारिस शवों की हो रही दुर्गति

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चंडीगढ़। लावारिस शवों का सात दिन में अंतिम संस्कार करने का पूर्व एसएसपी निलांबरी जगदले का आदेश यूटी पुलिस भूल गई है। स्थिति यह है कि लावारिस शव अस्पतालों के शवगृह में पड़े-पड़े सड़ रहे हैं। ताजा मामला 2 नवंबर को मिले एक लावारिस शव का है। शव की शिनाख्त के लिए सेक्टर-34 थाना पुलिस ने 21 नवंबर को अखबार में विज्ञापन दिया था। शव की शिनाख्त न होने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद ऑल इंडिया सेवा सीमिति को लगभग 45 वर्षीय व्यक्ति के शव के अंतिम संस्कार कराने के लिए प्रार्थना की गई। इसके बाद 25 नवंबर को अंतिम संस्कार हुआ। बता दें कि जीएमसीएच-32 के गेट नंबर दो के पास लावारिस व्यक्ति का शव मिला था। इसके बाद शव कई दिन अस्पताल के शवगृह में पड़ा रहा। ऑल इंडिया सेवा सीमिति के समस्य मदन लाल वशिष्ठ ने बताया कि प्रति माह उनके पास 10 से 12 लावारिस शव उनके पास अंतिम संस्कार के लिए पहुंचते हैं। बताया कि समय पर पोस्टमार्टम न हो पाने के चलते शवों से दुर्गंध आने लगती है और वह गलने भी लगते हैं। उन्होंने इसी वर्ष मार्च में डीजीपी प्रवीर रंजन को एक पत्र लिखा था। उसमें कहा गया था कि पूर्व एसएसपी नीलांबरी जगदले के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा। मांग की गई थी कि सभी थानों के प्रभारियों और जांचकर्ता अफसरों को आदेश जारी किए जाएं कि पूर्व एसएसपी के आदेशों का पालन करें और समय पर लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करवाएं। इसके बावजूद विभाग की लापरवाही जारी है।
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बता दें कि एक अक्तूबर 2018 को जारी आदेश में तत्कालीन एसएसपी नीलांबरी जगदले ने कहा था कि उनके संज्ञान में आया है कि लावारिस शवों के पोस्टमार्टम में अनावश्यक रूप से देरी हो रही है और कुछ मामलों में 20 दिन की देरी से भी पोस्टमार्टम हो रहा है। इस देरी से शव सड़ने लगते हैं। पूर्व एसएसपी ने कहा था कि यह मानवता और मृत शरीर के नैतिक सम्मान का अपमान है। ऐसे में लावारिस शवों के पोस्टमार्टम को लेकर सभी औपचारिकताएं और पोस्टमार्टम सात दिनों में पूरे किए जाएं। आदेश की प्रति सभी एरिया डीएसपी, थाना प्रभारियों और चौकी इंचार्ज को भेजी गई थी।
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