चंडीगढ़। शहर में नशे के बढ़ते नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने नशे की सप्लाई और बिक्री रोकने को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। कहा कि नशा बेचने वाले सप्लायरों और पैडलरों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। बैठक में गृह सचिव मंदीप सिंह बराड़, डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा, आईजीपी पुष्पेंद्र कुमार समेत सभी एसएसपी, एसपी, डीएसपी और थाना प्रभारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने शहर में नशे की स्थिति और अब तक की कार्रवाई की जानकारी दी।
58 हॉटस्पॉट पर पुलिस की नजर
पुलिस के मुताबिक शहर में 58 ऐसे हॉटस्पॉट चिह्नित किए गए हैं, जहां नशे के सेवन या तस्करी की शिकायतें सामने आई हैं। इन इलाकों में लगातार निगरानी की जा रही है। पहले नशा तस्करी में शामिल रहे आरोपियों की गतिविधियों पर भी नजर है। कई आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई चल रही है और वे न्यायिक हिरासत में हैं।
बीट सिस्टम होगा मजबूत, पैदल गश्त बढ़ेगी
प्रशासक ने थाना स्तर पर बीट सिस्टम मजबूत करने और संवेदनशील इलाकों में पैदल गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए। पुलिस को अचानक निरीक्षण करने को भी कहा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे के खिलाफ कार्रवाई में किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही सामने आने पर उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।
एएनटीएफ में साइबर और कानूनी विशेषज्ञ जुड़ेंगे
डीजीपी ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) को मजबूत करने की जानकारी दी। इसमें अतिरिक्त पुलिसकर्मियों के साथ साइबर और कानूनी विशेषज्ञों तथा अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। पुलिस नशे की सप्लाई से जुड़े नए स्रोतों का पता लगाने में जुटी है।
मेडिकल स्टोर भी निगरानी के दायरे में
नशीले और नियंत्रित पदार्थों वाली दवाओं की बिना डॉक्टर की पर्ची बिक्री रोकने के लिए मेडिकल स्टोरों की जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए। नागरिकों से नशे से जुड़ी सूचना लेने के लिए गोपनीय और त्वरित सूचना प्रणाली विकसित करने पर भी चर्चा हुई। कटारिया ने कहा कि चंडीगढ़ को नशामुक्त बनाने के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ पुनर्वास, परिवार और समाज की भागीदारी भी जरूरी है।