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Chandigarh News: चंडीगढ़ पंजाबी मंच का राजभवन तक निकाला मार्च पुलिस ने रोका

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चंडीगढ़। चंडीगढ़ में पंजाबी भाषा को पहला और प्रशासकीय भाषा का दर्जा दिलाने के लिए वीरवार को चंडीगढ़ पंजाबी मंच की ओर से राजभवन तक मार्च निकाला गया। पंजाबी मंच के पदाधिकारी और सदस्य सेक्टर-30 के मक्खन शाह लुबाना भवन के पास एकत्र हुए। बारिश में भी काफी संख्या में लोग पहुंचे। जैसे ही मंच के पदाधिकारी राजभवन के लिए कुछ ही कदम आगे बढ़े, पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोक दिया। रोके जाने पर वहीं पर नारेबाजी की। प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचकर मांगपत्र लिया।चंडीगढ़ पंजाबी मंच के अध्यक्ष सुखजीत सिंह सुक्खा ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ पंजाब के गांव को उजाड़कर बसाया गया है। यहां की भाषा पंजाबी है। चंडीगढ़ प्रशासन ने अंग्रेजी भाषा को पहले और शासकीय भाषा बनाया हुआ है। यह किसी भी हालत में स्वीकार नहीं है।
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उन्होंने चंडीगढ़ के राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को कहा कि राजनीतिक पार्टी के नेता याद रखें कि यह आखिरी चुनाव नहीं है। सभी पंजाबी प्रेमियों की उनकी जरूरत भी खत्म नहीं हुई है। राजनीतिक नेताओं के द्वारा धारण किया गया यह व्यवहार रास नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा कि जीवन चालाकियों के साथ नहीं चलता। चंडीगढ़ पंजाबी मंच का नेताओं ने याद कराया कि चंडीगढ़ पंजाबी बोलते गांव को उजाड़ के बसाया गया है। पहली नवंबर 1966 तक यहां दफ्तरी कामकाज की भाषा पंजाबी थी। भारतीय संविधान में देश का प्रबंध चलाने के लिए 22 भाषाओं का जिक्र है। इसमें अंग्रेजी है ही नहीं। इसमें पंजाबी भाषा दर्ज है। संविधान को ध्यान में रखते हुए ही देश के किसी भी राज्य की पहली प्रशासकीय और दफ्तरी कामकाज की भाषा अंग्रेजी को नहीं रखा गया है और ना ही किसी केंद्रीय शासित क्षेत्र को। चंडीगढ़ की 14 लाख की आबादी में से किसी एक भी मां बोली अंग्रेजी नहीं है। फिर यहां इसको क्यों मढ़ा गया है।
सभी वक्ताओं ने मांग की कि पंजाबी भाषा को पहली और दफ्तरी कामकाज की भाषा का दर्जा मिले। राजनीतिक नेता अपने द्वारा किए गए वादे को याद करते हुए इसे पूरा कराएं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में संघर्ष को और भी तीखा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल 2024 को भूख हड़ताल पर बैठे साथियों को राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने विश्वास दिलाया था कि चुनाव के बाद पंजाबी भाषा को पहली भाषा का दर्जा दिलवाएंगे। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के द्वारा किया गया ऐलान पंजाबी के साथ मोह करने वाले पंजाबियों को आज भी याद है।
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इस मौके पर बलकार सिद्धू डॉ सुखदेव सिंह सिरसा, देवी दयाल शर्मा, बलकार सिद्धू, बाबा साधु सिंह, बाबा गुरदियाल सिंह, शरणजीत सिंह, दीपक शर्मा चनारथल, गुरप्रीत सिंह सोमल खालसा ट्रैफिक कंट्रोल जत्था के प्रधान किरपाल सिंह, कुलदीप सिंह सैनी, रंजीत सिंह हंस, चंडीगढ़ गुरुद्वारा प्रबंधक संगठन के महासचिव रघबीर सिंह रामपुर सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
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