चंडीगढ़। नौकरी की सुरक्षा और नियमित करने की पॉलिसी की मांग को लेकर वीरवार को परिवार और बच्चों के साथ राजभवन घेरने जा रहे कांट्रैक्ट कर्मचारियों को पुलिस ने रोक दिया। सभी कर्मचारी सेक्टर- 17 के परेड ग्राउंड के पास मैदान में एकत्र हुए। कुछ ही कदम आगे बढ़ने पर बड़ी संख्या में तैनात पुलिस बल ने बेरिकेड लगाकर कर्मचारियों को रोक दिया। रोके जाने पर कर्मचारियों ने जोरदार नारेबाजी की। इसके बाद कर्मचारियों का एक प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम को राज्यपाल के नाम का ज्ञापन सौंपा। यह रोष मार्च ऑल कांट्रक्चुअल कर्मचारी संघ भारत के बैनर तले एकत्र हुए। कर्मचारी संघ के महासचिव शिव मूरत यादव ने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम में स्वीकृत पदों पर करीब 20 वर्षों से कांट्रैक्ट, आउटसोर्सिंग व रिटायर्ड कर्मचारी कार्यरत हैं।
उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने कोई सुरक्षित पॉलिसी नहीं बनाई है। न साथ लगते राज्यों की पॉलिसी को अपनाया है। सभी राजनीतिक दलों ने खोखले वादे किए है। कर्मचारियों का भविष्य अंधकार में है। हाल ही में चंडीगढ़ प्रशासन के पर्सोनल विभाग द्वारा सभी सरकारी व गैर सरकारी विभागों से नियमित भर्तियों के लिए खाली स्वीकृत पदों का खाका मांगा गया था। इसमें स्वीकृत पदों पर कार्यरत कांट्रैक्ट व आउटसोर्सिंग वर्कर्स के पदों को भी खाली मान कर चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा रैगुलर भर्तियों की कवायद शुरू करने की कोशिश जारी है। ऐसे में काम कर रहे कर्मचारियों की रात की नींद और दिन का चैन गायब हैं। संयुक्त कर्मचारी मोर्चा से गोपाल दत्त जोशी, राजिंदर कुमार, रणबीर राणा, धर्मेंद्र राही, हरकेश चंद, रघबीर चंद, राजिंदर कटोच, रंजीत मिश्रा, सज्जन सिंह, राजकुमार सहित अन्य नेताओं ने रोष मार्च में सहयोग किया। संयुक्त कर्मचारी मोर्चा के संयोजक गोपाल दत्त जोशी ने चेताया कि अगर किसी भी कांट्रैक्ट कर्मचारियों की नौकरी को कोई खतरा हुआ तो चंडीगढ़ में सभी विभागों में शीघ्र ही काम बंद का एलान किया जाएगा। यदि मामला नहीं सुलझा को आने वाले दिनों में हड़ताल होगी। कर्मचारी संघ के चेयरमैन बिपिन शेर सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा बीस वर्षों में लगभग न के बराबर नियमित भर्तियां की गई हैं। इसके कारण हजारों की संख्या में कर्मचारी ठेके पर काम कर रहे हैं। प्रधान अशोक कुमार ने कहा कि परिवार सहित कूच कर संघर्ष का बिगुल बजा दिया है। उन्होंने कहा कि इसका असर आने वाले लोकसभा चुनावों के नतीजों पर भी पड़ सकता है।