बीते समय अदालत से आरोपियों का रिमांड मांगे जाने के दौरान मामले में तीन अन्य लोगों के शामिल होने की जानकारी सार्वजनिक हुई थी, लेकिन यूटी पुलिस के उच्चाधिकारियों और एसआईटी ने अब इस बात से इनकार किया है। बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में किन्हीं भी अन्य तीन लोगों की पहचान सामने नहीं आई है। मामले में एसआईटी अब तक नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा यूटी पुलिस ने किसी अन्य आरोपी की पहचान उजागर होने से इनकार किया है।
यह है मामला
पिंजौर निवासी सुमन ने हाईकोर्ट में पिटीशन दायर कर कहा था कि एचसीएस ज्यूडिशियल का पेपर डेढ़ करोड़ में बिका। इसके लिए उन्हें भी पेशकश की गई थी। सुमन ने अपनी कोचिंग क्लास की एक साथी सुशीला से लेक्चर की ऑडियो क्लिप मंगाई थी, लेकिन उसने गलती से सुनीता से अपनी बातचीत की ऑडियो क्लिप सेंड कर दी। इसमें प्रश्न पत्र से संबंधित बातचीत रिकॉर्ड थी।
दायर पिटीशन पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अपने स्तर पर जांच में पाया कि हाईकोर्ट के ही रिक्रूटमेंट रजिस्ट्रार डॉ. बलविंदर शर्मा के मोबाइल नंबर से सुनीता के मोबाइल नंबर पर सालभर में 760 बार संपर्क हुआ। फिर परीक्षा में सुनीता ही टॉपर रही। आरोपी युवती सुशीला भी रिजर्व कैटेगरी की टॉपर बनी। आरोपी सुनीता की रुम मेट आयुषी भी मामले में शामिल थी। एसआईटी को जांच के दौरान पता लगा कि आरोपी आयुषी के पिता आरोपी सुभाष गोदारा, मामा सुशील भादू और तेजिंदर बिश्नोई भी शामिल है।