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चंडीगढ़ पुलिस का हाल: मामूली केसों के भगोड़ों को पकड़ने में जुटी पुलिस, 17 कुख्यात आतंकी गिरफ्त से बाहर

Thu, 23 Jan 2025 02:16 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संदीप खत्री, संवाद, चंडीगढ़

सार

चंडीगढ़ में पिछले कुछ समय से अपराध बढ़ा है। पुलिस छोटे मामलों के अपराधियों को पकड़ने में जुटी है, लेकिन पूर्व सीएम की हत्या से लेकर धमाकों तक के आरोपी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं।
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क्लब में धमाके का आरोपी - फोटो : फाइल
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विस्तार
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चंडीगढ़ में चौकी-थाने से लेकर आईएएस अफसर, एसएसपी, मंत्री और मुख्यमंत्री तक पर हमले हुए। इन हमलों में पूर्व मुख्यमंत्री, इंस्पेक्टर समेत कई पुलिसकर्मी शहीद हुए। एसएसपी समेत कई लोग घायल हुए। 
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मलोया पुलिस चौकी और मनीमाजरा थाने पर हमले में यूटी पुलिस ने 9 फरवरी 1993 में रोपड़ के गांव पंजौला निवासी जगतार सिंह उर्फ तारा और पंजाब के गांव धनौरी निवासी दिलबाग सिंह को भगोड़ा घोषित किया। दिलबाग ने मनीमाजरा थाने पर हमला किया था। 

चंडीगढ़ पुलिस जुए और अन्य मामूली केसों में शामिल भगोड़ों को पकड़ने में लगी हुई है जबकि 30 से अधिक सालों से फरार चल रहे 17 कुख्यात आतंकियों का पुलिस सुराग नहीं लगा सकी। पुलिस यह पता नहीं लगाने में भी विफल रही कि आतंकी जिंदा है या फिर मर चुके हैं। जबकि पुलिस के पास इन्हें पकड़ने के लिए पूरी फौज है। पुलिस नाकों पर खड़े होकर चालान काटते तक सीमित रह गई है।
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1993 रोज गार्डन में पंजाब पुलिस पर हुआ हमला

रोज गार्डन में पंजाब पुलिस पर हमला करने के मामले में 27 अप्रैल 1993 को जालंधर के थाना नूर महल के अंतर्गत आने वाले गांव बिल्गो निवासी गुरचरण सिंह को भगोड़ा घोषित किया था। सेक्टर- 26 थाने पर बम ब्लास्ट के मामले में 16 जनवरी 1991 को गुरदासपुर के गांव सोलापुर निवासी दौलत सिंह उर्फ बिट्टा को भगोड़ा घोषित किया था। सेक्टर-26 थाने की बिल्डिंग उड़ा दी गई थी। इससे पहले 80 के दशक में सेक्टर- 26 थाने पर ग्रनेड हमला हुआ था।

आईएएस निरंजन सिंह पर हमले का आरोपी सहित ये भगोड़े कहां है?

साल 2005 में सेक्टर-17 बस स्टैंड और 1999 सेक्टर-34 स्थित पासपोर्ट दफ्तर के पास पार्किंग में बम हमला हुआ था। ब्लास्ट में अमृतसर के गांव पंजवार निवासी परमजीत सिंह उर्फ पंजवार को भगोड़ा घोषित किया। हरियाणा सिविल सचिवालय चंडीगढ़ में पंजाब के आईएएस निरंजन सिंह पर हमले के मामले में कपूरथला के संडो चट्ठा निवासी वधावा सिंह को भगोड़ा घोषित किया गया था। चंडीगढ़ के पूर्व एसएसपी और पंजाब के फाइनेंस मिनिस्टर पर हमले के मामले में 10 दिसंबर 1994 में संगरूर के गांव डुलमा निवासी प्रीतम सिंह भगोड़ा घोषित किया।
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पूर्व मुख्यमंत्री की मौत के जिम्मेदार आतंकी जगरूप सिंह और पुरुषोत्तम का सुराग नहीं

31 अगस्त 1995 को पंजाब सिविल सचिवालय के पास हुए बम ब्लास्ट में पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्या कर दी गई थी। इस ब्लास्ट में 17 अन्य लोगों की भी जान गई थी। मामले में जम्मू स्थित कटरा के तलवारा कॉलोनी निवासी आतंकी जगरूप सिंह उर्फ निहंग और अंबाला के थाना नग्गल के अंतर्गत रहने वाले पुरुषोत्तम को पुलिस ने दो मार्च 1996 को भगोड़ा घोषित किया था। इस मामले में भी पुलिस कोई सुराग नहीं लगा सकी।

तत्कालीन एसएसपी पर हमले में चार जवान शहीद

29 अगस्त अगस्त 1991 में चंडीगढ़ के तत्कालीन एसएसपी सुमेध सिंह सैनी और उनकी टीम पर हुए आतंकी हमले में चंडीगढ़ पुलिस के एएसआई अमिचंद पटियाल और लालू राम समेत चार जवान शहीद हो गए थे। इसमें सैनी भी घायल हुए थे। मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने 25 मई 1993 को सेक्टर-37डी निवासी मनमोहन सिंह उर्फ मिंटा को भगोड़ा घोषित किया था जबकि कपूरथला निवासी डॉ. मंजीत सिंह और मोहाली फेज-7 निवासी बलवंत सिंह को 7 अगस्त 1993 को भगोड़ा घोषित किया था। यहां भी पुलिस विफल रही। 

शहीद हुए अमिचंद पटियाल के बेटे इंस्पेक्टर नरेंद्र पटियाल वर्तमान में चंडीगढ़ पुलिस में इंस्पेक्टर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। पुलिस ने आखिरी बार 7 नवंबर 2014 को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर एक आतंकी को गिरफ्तार किया था। आतंकी का नाम रतनदीप था, जिसे वर्ष 1999 में सेक्टर-34 पास्पार्ट दफ्तर के पास पार्किंग में हुए बम कांड में गिरफ्तार किया गया था। इस बम विस्फोट में तीन व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए थे। रत्नदीप को थाईलैंड से गिरफ्तार किया गया था। जिसके चंडीगढ़ पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आई थी। जेल से बाहर आने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। पीओ था, बाद में पकड़ा था।

सिपाही, एसआई और इंस्पेक्टर पर हुआ था हमला

सेक्टर-44 में पंजाब पुलिस के निरीक्षक कुलदीप सिंह की हत्या मामले में 17 नवंबर 1987 को कपूरथला के गांव सफाबाद निवासी बहादुर सिंह को भगोड़ा घोषित किया था। चंडीगढ़ पुलिस के सब इंस्पेक्टर अमरजीत सिंह की हत्या मामले में 12 मार्च 1993 को पटियाला के राजपुरा के गांव मडौली निवासी जोरा सिंह को पीओ घोषित किया। चंडीगढ़ पुलिस के सिपाही पर हमले के मामले में 15 जनवरी 1993 को गुरदासपुर निवासी सिपाही सुखदेव सिंह को पीओ घोषित किया।
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