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ऐप डाउनलोड करते समय गलती से एक ऑप्शन क्लिक हो गया, अब झेल रहा है कानूनी कार्रवाई

Fri, 19 Jun 2020 11:18 AM IST
खुशबू गोयल संवाद न्यूज एजेंसी, कपूरथला(पंजाब)
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फाइल फोटो
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ऐप डाउनलोड करते समय गलती से एक ऑप्शन पर क्लिक करना युवक को इतना महंगा पड़ा कि वह अब कानूनी कार्रवाई झेल रहा है। मामला पंजाब के कपूरथला में सामने आया। पंजाब सरकार ‘मिशन फतेह’ के तहत कोवा ऐप डाउनलोड करने के लिए लोगों से आग्रह कर रही है। लेकिन कस्बा काला संघिया के एक सामाजिक कार्यकर्ता को स्वास्थ्य विभाग की संगोष्ठि में शामिल होने के बाद कोवा ऐप डाउनलोड करना महंगा पड़ा गया।
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ऐप समझ न आने पर उन्होंने डिलीट कर दी तो थाना सदर की पुलिस ने क्वारंटीन के उल्लंघन का केस दर्ज कर लिया। केस दर्ज होने का पता उन्हें तब चला, जब पुलिस गिरफ्तार करने घर पहुंची तो सामाजिक कार्यकर्ता के नहीं मिलने पर फोन करके उन्हें मामले के बारे में बताया। अब सामाजिक कार्यकर्ता कभी थाना सदर तो कभी सिविल अस्पताल तो कभी डीसी ऑफिस के चक्कर काट रहा है। वहीं मामले में कोई अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
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ये है पूरा मामला

सामाजिक कार्यकर्ता सुरजीत सिंह ने बताया कि 11 जून को उन्होंने काला संघिया में स्वास्थ्य विभाग की एक संगोष्ठी में भाग लिया था। संगोष्ठी में वक्ताओं ने सभी से अपने मोबाइल में कोवा ऐप डाउनलोड करने की अपील की। उन्होंने भी कोवा ऐप डाउनलोड कर लिया। सेमिनार में उन्हें स्वास्थ्य विभाग से फिटनेस का प्रमाण पत्र भी मिला।

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जब उन्होंने घर पहुंचकर ऐप के फीचर्स जानने की कोशिश की तो उसमें केवल सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के भाषण थे। उन्हें ऐप उपयोगी नहीं लगी तो उन्होंने वह डिलीट कर दी। अगले दिन उन्हें कपूरथला के थाना सदर पुलिस का फोन आया कि आप पर क्वारंटीन भंग करने का मामला दर्ज किया गया है।

उन्होंने कहा कि वह तो बिल्कुल ठीक हैं और उनकी कोई ट्रेवल हिस्ट्री भी नहीं है तो ऐसे में उन्होंने कौन-सा क्वारंटीन का उल्लंघन कर दिया। बिना वजह एफआईआर दर्ज कर दी गई तो उन्हें बताया गया कि मोबाइल से कोवा ऐप डिलीट करने की वजह से उन्हें पुलिस केस का सामना करना पड़ रहा है।
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गलती से ऑप्शन दब गया था

सुरजीत ने बताया कि जब वह थाना सदर पहुंचे तो उन्हें हेल्थ विभाग भेज दिया गया और वहां से उन्हें डीसी ऑफिस भेज दिया गया। लेकिन कहीं भी कोई अधिकारी उनकी सुन नहीं रहा है। जबकि पुलिस कह रही है कि जब स्वास्थ्य विभाग उन्हें लिखकर देगा कि वह बिल्कुल ठीक हैं तो एफआईआर रद्द कर दी जाएगी।

लेकिन सामाजिक कार्यकर्ता सुरजीत सिंह बेवजह परेशानी में फंस गए हैं। सिविल सर्जन डॉ. जसमीत कौर बावा ने पहले तो कहा कि एफआईआर पुलिस करती है, स्वास्थ्य विभाग नहीं। जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनसे ऐप डाउनलोड करने पर सेल्फ क्वारंटीन की ऑप्शन दब गई था, जिससे मैसेज सरकार के पास पहुंच गया।

इसके आधार पर ही केस दर्ज हुआ है। विभाग की टीम ने उनके घर जाकर चेकअप कर लिया है और डीसी कपूरथला व थाना सदर पुलिस को लिखकर भेजा जा रहा है। उन पर केस दर्ज शाम तक रद्द हो जाएगा।
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