चंडीगढ़। पल्स पोलियो अभियान के अंतर्गत शहर में रविवार को डोर टू डोर अभियान की शुरुआत की जाएगी। अभियान के अंतर्गत रविवार और सोमवार को आंगनबाड़ी व स्वास्थ्य कर्मी घरों में जाकर बच्चों को पोलियो ड्राप पिलाएंगे। इसमें जन्म से लेकर 5 साल तक के बच्चों को दो बूंद जिंदगी की दी जाएगी। बता दें कि कोरोना महामारी के कारण पिछले 6 महीने के बाद यह पहला कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें बूथ पर पोलियो की खुराक देने की बजाय घरों में जाकर पिलाया जाएगा। वहीं स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि घरों में जाकर पोलियो ड्रॉप पिलाने से संक्रमण का प्रसार हो सकता है।
एक तरफ स्वास्थ्य विभाग बच्चों को कोरोना महामारी के बीच पोलियो जैसी घातक बीमारी से बचाने की जुगत में लगा हुआ है। वहीं दूसरी तरफ पोलियो अभियान की ड्यूटी में लगाई गई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता काफी डरी हुई हैं। उनका कहना है कि उन्हें घरों में जाकर बच्चों को वैक्सीन पिलानी होगी। इससे संक्रमण का प्रसार हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग को कर्मचारियों के बारे में कुछ सोचना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें संक्रमण से बचाव के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं कराया गया है। वे मास्क भी अपने पैसे से ही खरीद रहे हैं। उनका कहना है कि इस अभियान से पोलियो से बचाव हो न हो कोरोना संक्रमण जरूर फैलेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि 1 वायल में 18 बच्चों को वैक्सीन पिलाई जाती है। एक ही वायल अलग-अलग घरों में अलग-अलग बच्चों पर प्रयोग करने से संक्रमण का प्रसार हो सकता है। प्रशासन को इन सभी बातों पर मंथन करना चाहिए।