मंच संचालन करते हुए डॉ. मनीष गर्ग ने अपनी ओजस्वी वाणी से समां बांध दिया। सम्मेलन में कवयित्री नंदिनी ने वीर शिवाजी और महाराणा प्रताप के गौरव का गान करते हुए राष्ट्रभक्ति की अलख जगाई। डॉ. अश्वनी शांडिल्य ने अटल जी के व्यक्तित्व को राजनीति के कीचड़ में खिले ''''कमल'''' के रूप में परिभाषित किया। वहीं डॉ. अनीश गर्ग ने अपनी पंक्तियों के माध्यम से अटल जी जैसा अटूट व्यक्तित्व पाने की इच्छा व्यक्त की।
कवि सर्वेश शायर ने संकल्प की शक्ति और कवयित्री अनीता गरेजा ने रणभूमि में भारत माता के पुत्रों के शौर्य का वर्णन किया। इसके साथ ही राजेश आत्रेय, लविश चावला और अशोक भंडारी नादिर ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से अटल जी के मानवीय मूल्यों और देश के प्रति उनके अटूट प्रेम को याद किया।