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चंडीगढ़ IG का काव्य संग्रह ‘अस्सी घाट का बांसुरी वाला’ विमोचित, पढ़ें

Sun, 26 Jun 2016 08:38 PM IST
अमरीश शर्मा /अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ के आईजी तेजिंदर सिंह लूथरा की किताबा का विमोचन - फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ के आईजी तेजिंदर सिंह लूथरा के काव्य संग्रह ‘अस्सी घाट का बांसुरी वाला’ का शानदार विमोचन हुआ। इस मौके पर बोलते हुए आईजी ने बताया कि जिंदगी में कुछ अच्छी या बुरी घटनाएं कभी-कभी बहुत बड़ा बदलाव ला देती हैं। ऐसा ही बदलाव जिंदगी में तब आया जब 2008 में 26/11 के हमले ने एक आम नागरिक, लेखक और एक पुलिस अधिकारी के तौर पर विचलित कर दिया।
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हमले के बाद घटनास्थल का दौरा किया तो उसके बाद मन में बहुत सवाल थे, लेकिन उनके जवाब किसी के पास नहीं थे। जवाब मिले तो हीं ओर नहीं अपने ही मन से। बस फिर क्या था बचपन से लिखने का शौक जो पेशे के सिलसिले में लगभग छूट सा गया था, वह फिर से जाग गया और आज इसी का नतीजा है कि लोग अधिकारी के तौर पर भी जानते हैं तो कुछ लोग सिर्फ एक लेखक और कवि के तौर पर।

रविवार को यूटी गेस्ट हाउस में चंडीगढ़ साहित्य अकादमी की ओर से आयोजित रूबरू कार्यक्रम में आईजी लूथरा के कविता संग्रह ‘अस्सी घाट का बांसुरी वाला’ पर परिचर्चा हुई। इस संग्रह में जहां व्यवस्था से आक्रोशित व्यक्ति के मन की बात है तो, वहीं कुछ किस्सों को कविता में रूप में कहने की कोशिश की गई है।
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वहीं पहली कविता ‘अस्सी घाट का बांसुरी वाला’ कवि के बनारस दौरे के दौरान घाट पर घूमते हुए सामने आए किस्से पर आधारित है। इसे उन्होंने अपने कविता के तौर पर व्यक्त किया है कि कैसे एक आम आदमी का स्वर उसकी पीढ़ा और परेशानी के बाद बदल जाते हैं।
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कार्यक्रम में लूथरा ने कई कविताएं भी सुनाई

चंडीगढ़ के आईजी तेजिंदर सिंह लूथरा की किताबा का विमोचन - फोटो : अमर उजाला
इस मौके पर आईजी लूथरा ने कुछ चर्चित कविताएं सुनाईं। इनमें धीरे-धीरे से शब्द पकड़ा अर्थ बीत गया, अर्थ जागा तो शिल्प बीत गया, शिल्प समझा तो बिंब छूट गया...। ‘अंतराल का डर’ से ‘मैं तुम्से कुछ मांगू तुम शर्तिया दे ही दोगे, मगर मेरे मांगने और तुम्हारे देने के बीच जो पल का वकबा है वो एक पल की कशमकश का वकबा मुझे डरा देता है।

’ कुछ और नींदे से आज मैने दो सपने खरीदे, एक बड़ा-बड़ा दूसरा नया-नया, बड़े ने मुझे घेर लिया और नये ने बांध लिया...। ‘एक बूंद’ से ‘बिखर जाए सारा अमृत अब नहीं कोई भटकन...। इसके अलावा भी उन्होंने कई कविताएं जैसे, आराम से, एक कम महत्व वाला आदमी आदि पढ़कर सुनाईं।

बचपन से था लिखने का शौक
आईजी लूथरा ने बताया कि लिखने का शौक पर उन्हें बचपन से ही था, लेकिन उस समय पता नहीं था कि एक दिन इससे भी एक पहचान बनेगी। कॉलेज के बाद सिविल सर्विस में चुने गए तो यह शौक नौकरी के कारण छूट सा गया। लेकिन मुंबई में 2008 में हुए हमले के बाद इसे फिर से शुरू किया। उस हादसे के बाद फिर से लिखना शुरू किया और आज तक लिख रहा हूं। जल्द ही उनका अगला काव्य संग्रह भी आएगा। इसका नाम होगा ‘जो नहीं मरा है’।
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