चंडीगढ़ में शराब की बिक्री के लिए प्रशासन द्वारा 2020-21 के लिए बनाई गई एक्साइज पॉलिसी को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इसे भेदभावपूर्ण बताया। याचिका में कहा गया कि इससे एकाधिकार को बढ़ावा मिलेगा इसलिए इसे रद्द कर दिया जाना चाहिए। जस्टिस राजन गुप्ता एवं जस्टिस कर्मजीत सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए चंडीगढ़ प्रशासन सहित एक्साइज विभाग को 8 जुलाई के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सेक्टर-17 के राजबीर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एक्साइज पॉलिसी के कई प्रावधानों में खामियां बताई हैं। याचिका में बताया है कि इस पॉलिसी के तहत देश में बने विदेशी ब्रांड्स की शराब की होलसेल करने वालों की संख्या सिर्फ 5 है, इनसे सभी रिटेलर्स को यह ब्रांड्स खरीदनी पड़ती है । ऐसे में इस पूरे ट्रेड में कुछ खास लोगों का एकाधिकार होता जा रहा है। तय है कि वह अपने अपने करीबियों को यह देंगे।
याचिकाकर्ता जैसे रिटेल करने वालों को स्टॉक ही पूरी नहीं मिल पाता है, कई बार तो उन्हें मार्केट रेट से महंगी शराब लेनी पड़ती है। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि एल-10 बी लाइसेंस के कारण भी उन्हें नुकसान उठाना पड़ा है। इस लाइसेंस के चलते कुछ खास डिपार्टमेंटल स्टोर, जो तय शर्तें पूरी करते हैं, उन्हें विदेशी ब्रांड्स रखने की इजाजत दी गई है। इसकी लाइसेंस फीस महज 20 लाख रुपये है। जबकि याचिकाकर्ता जैसे एल 2 रिटेलर्स की लाइसेंस फीस 40 करोड़ रुपये है।
उसने कहा कि कोरोना के चलते लॉकडाउन के कारण पहले ही उन्हें खासा नुकसान हुआ है। बाद में कुछ शर्तों के साथ से ठेके खोले जाने की इजाजत दी गई। इसमें ज्यादातर एल.10 बी वाले थे । हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।