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11 को यह नाटक देखने बड़े आएं, बच्चों को नो एंट्री

Wed, 10 Sep 2014 04:03 PM IST
रूबी सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
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सखा राम बाइंडर नाटक की कहानी में जिस तरह नायक अपनी पत्नी के साथ क्रूरता से व्यवहार करता है, उसे एक आम मंच पर दिखाकर मेरा मन बहुत ही घबरा जाता है, लेकिन समाज का यह भी सच दिखाना जरूरी है। सच कहूं तो यह नाटक जब भी करता हूं मैं कई रातें चैन से सो नहीं पाता। बहुत घबराहट हो जाती है, शायद यही वजह है कि यह नाटक 13 साल बाद कर रहा हूं।
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अपने हिट नाटक ‘सखा राम बाइंडर’ के बारे में कुछ ये बातें शहर के मशहूर रंगमंच निर्देशक और डिपार्टमेंट आफ इंडियन थियेटर पीयू के पहले बैच (1973) पास आउट उमेश कांत ने कही, जो 2005 के बाद यह नाटक 11 सितंबर को एक बार फिर लेकर आ रहे हैं। इस नाटक का मंचन पंजाब कला भवन सेक्टर-16 में शाम सात बजे होगा। नाटक का यह 14वां शो होगा।

नाटक कहानी की वजह से बच्चे की नो एंट्री
इस नाटक में कुछ सीन ऐडल्ट हैं और इसमें एक औरत के प्रति उसके पति की क्रूरता के सीन दिखाए गए हैं। निदेशक ने बताया कि नाटक की कहानी के अनुसार इसके कुछ सीन काफी गंभीर और बच्चों के देखने लायक नहीं हैं। इसलिए इस नाटक में बच्चों की एंट्री नहीं है।
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नाटक की कहानी में दिखाया गया कि एक आदमी जो बहुत बुरा होता है वह दिल का सच्चा और किसी को धोखा देने वाला नहीं होता। वह अक्सर उन महिलाओं को अपने घर में रखता है जो असहाय होती हैं। इस बीच वह एक महिला से शादी करता है, जो बेहद धार्मिक होती है।

बुरा होने की वजह से वह उसे घर से निकाल देता है। इसके बाद वह एक बुरी महिला से शादी करता हैं, जो नायक के दोस्त के साथ ही अफेयर चलाती है। इस बीच उसे उसकी पहली पत्नी जो धार्मिक होती है उसकी दूसरी पत्नी का सच बताती है। नायक अपनी दूसरी पत्नी का कत्ल कर देता है और पहली पत्नी के पास चला जाता है।

पत्नी भी उसे स्वीकार कर लेती है। निर्देशक ने बताया कि इसमें ‘हर आदमी अच्छा इंसान होता है, चाहे वह कितना ही बुरा क्यों हो’ दिखाने की कोशिश की गई है। इस नाटक को डिपार्टमेंट आफ  इंडियन थियेटर पीयू के कलाकार ही प्रस्तुत करेंगे।
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