चंडीगढ़। किसी नाटक की सफलता की कहानी सिर्फ किरदार ही नहीं, बल्कि नाटक से जुड़ा हर पहलू इसमें अहम योगदान देता है। टैगोर थियेटर में रविवार को मंचित नाटक लूणा की सफलता की कहानी सिर्फ निर्देशक या कलाकार नहीं, बल्कि एक टीम की है। चाहे सेट हो या फिर म्यूजिक या कलाकारों का नृत्य.. ऐसी बारीकी से तराशा गया कि अबकी बार नाटक ‘लूणा’ एकदम सजीव हो गया।
शिव कुमार बटालवी के महाकाव्य का नाटकीय अंदाज ‘लूणा’ ऐसी ही एक बड़ी प्रोडक्शन का उदाहरण बना। कुलदीप शर्मा ने इस नाटक का निर्देशन किया और इसमें कई प्रयोग भी किए। कहानी के एडाप्टेशन से लेकर लूणा के मंचन तक में अंदाज एकदम नया था, जिस परिकल्पना के साथ शिव ने लूणा की तस्वीर को पेश की जिससे लूणा की एक नई ईबारत लिखी गई।
दो घंटे 10 मिनट का यह नाटक राजा सलवान, लूणा और पूरन की कहानी है, जिसमें लूणा की स्थिति को दर्शाया गया है। नाटक की कहानी में राजा सलवान जब लूणा को एक समारोह में नृत्य करते देखता है तो वह उसको पसंद कर लेता है। फिर वह उससे शादी करने का फैसला कर लेता है। इसके बाद नाटक की कहानी में कई उतार चढ़ाव आते हैं। इसके बाद लूणा राजा के बेटे पूरन की ओर आकर्षित हो जाती है पर पूरन उसको मां मानता है और कहता है। लूणा बार-बार पूरन के करीब जाना चाहती है और पूरन उसको मां कहकर उसकी इज्जत करता रहता है। ऐसे में लूणा पूरन के इंकार के बाद उससे बदला लेने के लिए राजा से उसकी झूठी शिकायत करती है। इसके बाद राजा पूरन को सजा दे देता है। इस नाटक में लाइव म्यूजिक था। इसे अतुल शर्मा ने डायरेक्ट किया। इस अवसर पर अतुल शर्मा ने कहा कि शिव के गीतों को थियेटर म्यूजिक में बदलना चैलेंज था। इसलिए जर्मन थियेटर प्रेक्टिशनर बटोल्ट ब्रेख्त की टेक्नीक एलिवेशन के मुताबिक इसे डिजाइन किया गया। इसमें हारमोनियम, तबला, की-बोर्ड इस्तेमाल किया।
इसमें अज दिन चढ़ेया तेरे रंग वरगा, मैं अग्ग तुरी परदेस, मैनूं विदा करो को शामिल किया गया। इस नाटक में लूणा का किरदार मृदुला महाजन ने और राजा सलवान का किरदार कुलदीप शर्मा ने निभाया। इसमें पूरन का किरदार वरुण शर्मा ने निभाया। राजा वर्मन का किरदार अमित तलवार ने निभाया जबकि रानी कुंत का किरदार रजनी बजाज ने निभाया। इस नाटक में बारू का किरदार यशपाल कुमार ने निभाया। जबकि जल्लाद के रूप में लवलीन सैनी और रजत ने अपनी भूमिका साथ न्याय किया।