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ख्वाहिशें

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चंडीगढ़। सीएनएसए थियेटर फेस्ट के पहले दिन सोमवार को टैगोर थियेटर में ‘ख्वाहिश’ नाटक का मंचन किया गया। सात्विक आर्ट्स ग्रुप की ओर से मंचित यह नाटक अंतोन चेखव की कहानी शे मेकर एंड द डेविल पर आधारित था। लेखक शिवम के इस नाटक का निर्देशन राजा सुब्रमण्यम और एस.एस. सिधु ने किया।
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नाटक की कहानी एक अधेड़ उम्र के जूते बनाने वाले एक व्यक्ति के इर्द गिर्द घूमती है। यह अमीर लोगों के बर्ताव से उकता चुका है। गरीबी की वजह से उसे बार बार नीचा दिखाया जाना पसंद नहीं है। फ्योडोर अमीर होना चाहता है। एक दिन वो अपने एक ग्राहक के यहां जूते देने जाता है। पहले तो सब ठीक रहता है पर फ्योडोर टैब उस समय भौचक्का रह जाता है जब वो ग्राहक खुद को शैतान बताता है। वह कहता है वो उसकी हर ख्वाहिश पूरी करेगा, पर सिर्फ इस शर्त पर कि फ्योडोर की आत्मा शैतान के नाम हो जाएगी। फ्योडोर शर्त मान लेता है और शैतान उसे अमीरी के चरम पर पहुंचा देता है। इन सब के बाद फ्योडोर के लिए शैतान भगवान से भी बढ़ कर हो जाता है। फिर उसे एहसास होता है कि उसने अपनी आत्मा शैतान को देकर अच्छा नहीं किया। दुनियाभर की अमीरी पा कर वो अपनी आजादी और खुशी खो बैठा। जिस अमीरी की उसे ख्वाहिश थी वो अब उसे चुभने लगी थी। आखिर में जब उसे ये एहसास होता है, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
इस नाटक के बारे में कमल अरोड़ा ने कहा कि वास्तव में नाटक बताता है कि अपनी इच्छाओं से सतर्क रहना चाहिए। फ्योडोर एक ख्वाहिश के लिए अपनी आत्मा शैतान के हवाले कर देता है। शायद हम सब कभी न कभी ऐसा करते ही हैं। लेखक ने शैतान के माध्यम से हमारे अंदर के नकारात्मक पक्ष और लालच को उजागर किया है, जिसके लिए हम अपनी आत्मा तक बेच देते है लेकिन फिर भी खुश नही रह पाते। हम सबके अंदर एक पक्ष होता है जो ये मानता है कि खुशी का अमीरी से कोई लेना देना नही है इसलिए ये नाटक हर वर्ग को आकर्षित करता है।
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नाटक के पात्र
फ्योडोर- सय्यद आलिम
मारया- दिवजोत
कूज़्मा- दिव्यांशु बिष्ट
जेसिका- सुनिधि भट्टी
विक्टर- रमनदीप
इगोर- पुलकित सैनी
अंतोन- अर्पण माइती
ऑस्त्रो- चेतन राघव
वेटर्स- हर्ष अरोरा, रजत पल, आकाश वीर सिंह, धीरज शर्मा
डेविल- शिवम
दोनदिअगो- उदय शेओरण
अन्य पात्र- शिवानी, यश शोरान, जयंतिका, अनूप छाबरा, पूजा पाठक, तुषार बंसल, हरप्रीत
संगीत परिकल्पना- दुर्गेश अटवाल
बोल- शिवम
गायक- दुर्गेश अटवाल
संगीत सहायक- तुषार महाजन, पुलकित सैनी
प्रकाश परिकल्पना- सर्वर अली
प्रकाश संचालन- सर्वर अली
रूप सज्जा- पलक जोशी
मंच परिकल्पना- मनीष पचीआरु
रचनात्मक सहयोग- अमित सनोरिया, सर्वर अली
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