हरियाणा में पराली के बाद अब गेहूं के अवशेष (तूड़ी) पर भी सेटेलाइट के जरिये नजर रखी जाएगी। पिछले साल पराली जलाने के मामले बढ़ने को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने पर्यावरण को नुकसान से बचाने की दिशा में एहतियाती कदम उठाने का निर्णय लिया है। इसके लिए हरियाणा प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
प्रदेश में पराली जलाने के मामले वर्ष 2013-14 में करीब 2.08 लाख वर्ग हेक्टेयर, 2014-15 में एक लाख, 70 हजार जबकि 2015-16 में 2 लाख, तीन हजार वर्ग हेक्टेयर क्षेत्रफल में सामने आईं। खास बात यह रही कि जींद, सिरसा और फतेहाबाद में इससे संबंधित घटनाएं बढ़ीं। हरसेक (हरियाणा स्पेस एप्लिकेशन सेंटर ) के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. रमेश हुड्डा ने बताया कि इसके लिए लगातार मॉनिटरिंग की जाती है। पिछले वर्ष यह आंकड़ा बढ़ा है। हरियाणा स्पेस एप्लिकेशन सेंटरकी ओर से गेहूं के अवशेषों पर भी सेटेलाइट के जरिये नजर रखी जाएगी।
पीपी बैग का भी होगा इस्तेमाल
हरियाणा में एक अप्रैल से शुरू हो रही गेहूं की खरीद को देखते हुए इस बार जूट के अलावा पॉली प्रोपेलीन (पीपी) बैग का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इससे फसल को जहां सुरक्षित रखा जा सकेगा, वहीं नुकसान की आशंका भी कम हो जाएगी। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस बार जूट की थोड़ी कमी होने की वजह से पीपी बैग का भी इस्तेमाल किया जाएगा।