एचएमटी का पिंजौर स्थित ट्रैक्टर डिवीजन 24 जनवरी से बंद कर दिया जाएगा। अब तक यहां रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर तैयार कर देश भर में भेजे जाते थे। इस डिवीजन के 1000 कर्मियों और अधिकारियों में 850 ने वीआरएस ले ली है, जबकि 150 कर्मियों ने इससे खास फायदा न मिलने का हवाला देते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। कंपनी के सीएमडी की ओर से ट्रैक्टर डिवीजन को बंद करने के आदेश दे दिए गए हैं। बंदी के इस फैसले से किसी तरह के विपरीत हालात न बने इसके लिए सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।
इससे लोगों की चिंताएं बढ़ने लगी हैं। इससे क्षेत्र के विकास को भी झटका लगेगा। एचएमटी के ट्रैक्टर डिवीजन में हर साल हजारों की संख्या में ट्रैक्टर तैयार होते थे। सीएमडी की ओर से जारी आदेश में हवाला दिया गया है कि 1083 करोड़ रुपये का वित्तीय पैकेज देने के बाद भी इसके वजूद को कायम रखना संभव नहीं हो पाया। नतीजतन, कंपनी ने 24 जनवरी से डिवीजन को बंद करने के साथ-साथ सभी कर्मियों को टर्मिनेट करने का भी निर्णय लिया गया। जबकि कोर्ट गए कर्मचारियों के संबंध में अदालत के आदेश के मुताबिक निर्णय लिया जाएगा।
एचएमटी बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक विजय बंसल ने कहा कि पैकेज के तौर पर डिवीजन को 91 करोड़ रुपये ही मिले हैं। 150 कर्मियों का कहना है कि उन्हें वीआरएस से कोई खास लाभ नहीं मिल रहा है, इसलिए उन्होंने अदालत में याचिका दायर की है। उनकी मांग है कि या तो उन्हें किसी दूसरी यूनिट में एडजस्ट किया जाए या विशेष पैकेज दिया जाए।