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पीआर-4 लिंक रोड के हरे पेड़ बचाएगी पिंच बचाव कमेटी, अधिग्रहित भूमि पर लगे हैं 100 से ज्यादा हरे पेड़

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चंडीगढ़। तोंगा-सारंगपुर लिंक रोड पीआर 4 के लिए अधिग्रहित की गई जमीन में आने वाले हरे पेड़ों को बचाने के लिए पिंड बचाव कमेटी उतर आई है। कमेटी ने चंडीगढ़ के प्रशासक व एडवाइजर से अधिग्रहित भूमि में लगे फलदार और छायादार पेड़ों को बचाने की मांग की है। साथ ही पेड़ों को अन्य स्थान पर रि-ट्रांसप्लांट किए जाने का सुझाव दिया है।
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जानकारी के अनुसार पीआर-4 रोड के लिए यूटी प्रशासन ने डड्डूमाजरा और धनास में 17.76 एकड़ जमीन अधिग्रहित की है। इसके लिए प्रशासन जमींदारों को 69 करोड़ रुपये मुआवजे के तौर पर दे रहा है। धनास के जमींदारों के लिए 5.25 करोड़ रुपये प्रति एकड़ व डड्डूमाजरा के लिए 3.22 करोड़ प्रति एकड़ मुआवजा निर्धारित किया गया है। करोड़ों रुपये की अधिग्रहित की गई जमीन पर आम, जामुन और अन्य 100 से अधिक हरे पेड़ लगे हुए हैं। पेड़ों को काटने के लिए प्रशासन ने मंजूरी भी दे दी है।
करीब 100 साल पहले बुजुर्गों ने पौधे रोपे, अब इन्हें बचाना हमारी जिम्मेदारी
पिंड बचाव कमेटी का कहना है कि जमीन पर हरे पेड़ों को उनके बुजुर्गों ने करीब 100 साल पहले रोपा था। अब इन्हें बचाना हमारी जिम्मेवारी है। धनास के पूर्व सरपंच कुलजीत संधू ने बताया कि पेड़ों को बचाने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई जाएगी। साथ ही पेड़ों को रि-ट्रांसप्लांट किए जाने का सुझाव भी दिया जाएगा।
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अजवाइन-आम के भी हैं पेड़
अधिग्रहित भूमि पर कुछ ऐसे फलों के वृक्ष हैं, जो अब चंडीगढ़ में विलुप्त होने की कगार पर हैं। इनमें अजवाइन-आम के पेड़ शामिल हैं। कमेटी पदाधिकारियों ने बताया कि यह पौध उनके पृर्वज उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद (हरदोई) से लेकर आए थे। अब प्रशासन विकास के नाम पर इन्हें काटने जा रहा है।
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