प्रशासक बदनौर ने जेनरे म्यूजियम का किया उद्घाटन
चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने बुधवार को शहर के शिल्पकार पियरे जेनरे की 121 वीं जयंती पर सेक्टर-5 स्थित जेनरे हाउस में बने म्यूजियम का उद्घाटन किया। इस दौरान सीनियर आकिैटेक्ट एसके शर्मा ने यह प्रस्ताव रखा कि सुखना में जिस जगह जेनरे की अस्थियां प्रवाहित की गई थी, वहां स्मारक बनाया जाए। लेक पर व्यू प्वाइंट के पास ही जेनरे की अस्थियां विसर्जित की गई थी।
प्रशासक ने पूरे म्यूजियम का निरीक्षण किया। म्यूजियम की डायरेक्टर दीपिका गांधी ने बदहाल जेनरे हाउस और कड़ी मेहनत के बाद उसको वही पुराना रूप देने की प्रस्तुति दी। प्रशासक ने पूरी टीम के प्रयासों को जमकर सराहा। प्रशासक ने कहा कि अपनी विरासत को संभालने का यह बेहतरीन उदाहरण है। जापान में इस तरह का काम हो रहा है। अपने यहां देखकर बड़ा अच्छा लग रहा है।
प्रशासक बदनौर ने कहा कि यह म्यूजियम आर्किटेक्चरल स्टूडेंट कन्वेंशन सेंटर के लिए बेहतरीन स्थान है। यहां पर शोधार्थियों को सीखने के लिए बहुत कुछ मिलेगा। उद्घाटन अवसर एडवाइजर परिमल राय, टूरिज्म डायरेक्टर जितेंद्र यादव, चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद, चीफ आर्किटेक्ट कपिल सेतिया और दादर नगर हवेली से आए होटल मैनेजमेंट के स्टूडेंट मौजूद रहे।
खंडहर घर को म्यूजियम की शक्ल देने वाले मजदूर सम्मानित
प्रशासक बदनौर ने जेनरे म्यूजियम का किया उद्घाटन
साधारण व्यक्ति थे जेनरे
पियरे जेनरे के साथ काम कर चुके सीनियर आर्किटेक्ट एसडी शर्मा ने कहा कि जेनरे बहुत साधारण व्यक्ति थे। अधिकतर वह सफेद शर्ट और पेंट पहनते थे। प्यून को बुलाने की बजाए खुद उठकर पानी पीया करते थे। महंगी चीजों का इस्तेमाल नहीं करते थे। मार्बल की बजाए नदियों से पत्थर लाकर वह अपनी बिल्डिंग में इस्तेमाल करते थे। बाद में नेकचंद ने भी उनसे प्रेरणा लेकर रॉक गार्डन का निर्माण किया। जेनरे म्यूजियम में उनके काम की सभी जानकारी उपलब्ध है। जेनरे ने स्कूल, कॉलेज की बिल्डिंग, मुख्यमंत्री निवास, एमएलए होस्टल, पीयू का गांधी भवन, लाइब्रेरी, एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक और कई टाइप के घर डिजाइन किए।
खंडहर घर को म्यूजियम की शक्ल देने वाले मजदूर सम्मानित
खंडहर हो चुके जेनरे हाउस को कड़ी मेहनत कर वही पुरानी लुक देने वाले मजदूरों को उद्घाटन अवसर पर प्रशासक ने सम्मानित किया। पेंटर, राज मिस्त्री और दूसरे मजदूरों को प्रशासक ने स्मृति चिह्न भेंट किए।