पंजाब में हुई हिंदू नेताओं की तारगेट कीलिंग का मामला काफी दिलचस्प हो गया है। पाकिस्तान में मारे गए खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स केएलएफ के प्रमुख हरमीत सिंह उर्फ पीएचडी का नाम अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) केस से हटाना चाहती है। इसके लिए अदालत में एनआईए ने एप्लीकेशन भी लगाई है। लेकिन अदालत ने एनआईए को उसकी डेथ वेरिफिकेशन रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए। लेकिन अब उसकी रिपोर्ट कैसे पेश की जाए, यह एनआईए के लिए मुसीबत बनी हुई। क्योंकि उसकी मौत पाकिस्तान में हुई है।
ऐसे में उसकी रिपोर्ट कैसे लाई जाए। वहीं, सोमवार को अदालत ने केस की तारीख इसी महीने के आखिर की डाल दी है। इस संबंधी फैसला लिया जाएगा। मिली जानकारी के मुताबिक पंजाब में कुछ समय पहले हुई तारगेट कीलिंग से जुड़े केसों की जांच एनआईए कर रही है। एनआईए की तरफ से जब केस से जुड़ी चार्जशीट अदालत में फाइल की गई थी। उस समय पाकिस्तान में रह रहे हरमीत सिंह उर्फ पीएचडी का नाम भी आरोपियों में शामिल किया था।
उस पर आरोप था कि तागरेट की कीलिंग में हत्याओं को अंजाम देने वाले दोनों मुख्य आरोपियों को हथियारों आदि की ट्रेनिंग उसकी तरफ से दी गई थी। लेकिन इसी बीच जनवरी में हरमीत सिर्फ उर्फ पीएचडी की मौत की खबर आई थी। इसके बाद एनआईए की तरफ से उसका नाम केस से हटाने के लिए एप्लीकेशन लगाई गई थी। एनआईएन ने यह एप्लीकेशन 20 फरवरी को लगाई थी। जिसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च निश्चित की थी।
इस दौरान भी एनआईए उसकी हैप्पी की रिपोर्ट पेश नहीं कर पाई। जिक्रयोग है कि पंजाब में तागरेट कीलिंग के दौरान आरएसएस लीडर ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा, सुल्तान मसीह समेत कई लोगों की हत्या हुई थी। इसके बाद पुलिस ने हरमीत सिह पीएचडी, हरदीप सिंह शेरा, रमनदीप सिंह उर्फ कैनेडियन, अनिल कुमार उर्फ काला, धमेंद्र सिंह, गुरजिदंर सिंह उर्फ शास्त्री, गुरशरनवीर सिंह और गुरजंट शामिल थे। इनमें से शास्त्री, पीचडी और गुरशनरवीर सिंह को पीओ घोषित किया गया था।