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Chandigarh: मॉन्ट्रियल की तर्ज पर बनेगी पीजीआई की तुलसीदास लाइब्रेरी, संग्रहालय के रूप में किया जाएगा विकसित

Tue, 05 Dec 2023 11:41 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पीजीआई के फैकेल्टी लाइब्रेरी प्रभारी प्रो. एसएस राणा का कहना है कि संस्थान में बहुत सारी पुरानी पत्रिकाए हैं, जो ऐतिहासिक हैं। उन्हें संग्रहित करने की प्रक्रिया चल रही है। उन अभिलेखागारों में 1960 के दशक के पूर्व निदेशकों के प्रकाशन और उनके हाथ से लिखे गए नोट्स भी शामिल हैं।
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तुलसीदास लाइब्रेरी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कनाडा के मॉन्ट्रियल की लाइब्रेरी की तर्ज पर पीजीआई को नई लाइब्रेरी की सौगात जल्द मिलने जा रही है। लाइब्रेरी में जहां किताबों के रख-रखाव की बेहतर व्यवस्था होगी, वहीं कमरों को तापमान के अनुकूल बनाया जाएगा ताकि किताबों को नुकसान से बचाया जा सके। पीजीआई की तुलसीदास लाइब्रेरी को म्यूजियम की तरह विकसित किया जाएगा। इतना ही नहीं, पीजीआई के पूर्व विशेषज्ञों के हस्तलिखित शोध पत्रों को भी यहां प्रदर्शित किया जाएगा। पीजीआई प्रशासन के अनुसार यहां लाइब्रेरी कम म्यूजियम की सुविधा दी जाएगी, जो संस्थान के इतिहास को भी दर्शाएगा।

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पीजीआई के फैकेल्टी लाइब्रेरी प्रभारी प्रो. एसएस राणा का कहना है कि संस्थान में बहुत सारी पुरानी पत्रिकाए हैं, जो ऐतिहासिक हैं। उन्हें संग्रहित करने की प्रक्रिया चल रही है। उन अभिलेखागारों में 1960 के दशक के पूर्व निदेशकों के प्रकाशन और उनके हाथ से लिखे गए नोट्स भी शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि वे कनाडा की मॉन्ट्रियल लाइब्रेरी में गए हैं, जिसमें पुरानी पत्रिकाओं/ग्रंथों के स्टोरेज के लिए उपयुक्त तापमान वाले अच्छी तरह से डिजाइन किए कमरे हैं। जहां वे पिछली दो शताब्दियों से संरक्षित हैं। वहां स्क्रब सूट, चप्पल और मास्क पहनकर प्रवेश करना होता है। उसी तर्ज पर पीजीआई की लाइब्रेरी में भी ऐसी व्यवस्था बहाल की जाएगी। इसके लिए तैयार प्रस्ताव को पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने मंजूरी दे दी है।

विकास कार्य तेजी पर

प्रो. राणा ने बताया कि लाइब्रेरी के डिजिटलीकरण के अलावा, वाचनालय में सेंसर आधारित लाइटें लगाई जा रही हैं। इसके साथ ही पूर्व संकाय के लिए एक साउंड प्रूफ चर्चा कक्ष है, जहां वे छात्रों के साथ बैठकर चर्चा करते हैं। उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी प्रबंधन के कुछ तरीके आईआईएम अहमदाबाद से भी अपनाए हैं, जो एक प्रमुख लाइब्रेरी मानी जाती है।

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पुत्र ने पिता को सौगात देने के लिए उठाया कदम

संग्रहालय का सुझाव पीजीआई के पूर्व संकाय और अब अमेरिका में एक प्रतिष्ठित हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आईएस आनंद की ओर से आया था। वह कोविड महामारी से ठीक पहले अपने पिता के आरकाइव को पीजीआई पुस्तकालय को दान करने के लिए आए थे। उनके पिता डॉ. संतोक सिंह आनंद पीजीआई के दूसरे निदेशक थे। पीजीआई की लाइब्रेरी में पांच हजार से अधिक ऑनलाइन प्रतिष्ठित पत्रिकाओं और 60 हजार से अधिक ई-पुस्तकों और मुद्रित पुस्तक हैं। इसमें 250 लोगों के बैठने की क्षमता है। यह तीन मंजिला है। मौजूदा समय में इसमें हिंदी और पंजाबी में प्रेरक पुस्तकों का एक नया खंड भी जोड़ा गया है।

इसलिए खास है ओस्लर लाइब्रेरी

कनाडा के ओस्लर लाइब्रेरी में दुर्लभ और पुरानी पुस्तकों के अलावा वर्तमान माध्यमिक कार्यों और ऐतिहासिक ग्रंथों के आधुनिक संस्करणों के साथ-साथ एक संदर्भ संग्रह, अभिलेखागार व पांडुलिपियों, चित्रों और कलाकृतियों का एक मजबूत परिसंचारी संग्रह (सर्कुलेटिंग कलेक्शन) है। वर्तमान में पुस्तकालय में रखी गई किताबों की कुल संख्या लगभग 100000 है। इसमें पुरानी व नई पुस्तकों के साथ-साथ स्वास्थ्य विज्ञान और संबंधित क्षेत्रों के इतिहास के बारे में पत्रिकाएं भी शामिल हैं। पुस्तकालय में एक महत्वपूर्ण अभिलेखीय संग्रह भी शामिल है जिसमें 200 से अधिक अभिलेखीय संग्रह व सामग्री हैं, जो 19वीं शताब्दी से चिकित्सा के इतिहास और विकास व इसके शिक्षण का दस्तावेजीकरण करता है।
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