चंडीगढ़। पीजीआई की इमरजेंसी में हर महीने 45 साल से कम उम्र के करीब आठ मरीज स्ट्रोक के आ रहे हैं। इन मरीजों में दिल का छेद स्ट्रोक का कारण बन रहा है। ऐसे मरीजों को दिल में छेद के अलावा और कोई मर्ज नहीं होता, जो स्ट्रोक का कारण बने। बिना किसी कारण स्ट्रोक का शिकार हो रहे युवाओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए पीजीआई के न्यूरोलॉजी विभाग ने इसके कारणों का पता लगाने के लिए शोध किया है। जिसके परिणाम में यह बात सामने आई है कि उनमें स्ट्रोक का कारण दिल का छेद है। पीजीआई का यह शोध न्यूरोलॉजी इंडिया जनरल में प्रकाशित किया गया है।
शोध के प्रमुख अन्वेषणकर्ता व न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. धीरज खुराना ने बताया कि पेटेंट फोरामेन ओवले (पीएफओ) हृदय के बाएं और दाएं अटरिया (ऊपरी कक्ष) के बीच एक छेद है। यह छेद जन्म से पहले हर किसी में मौजूद होता है, लेकिन अक्सर जन्म लेने के कुछ समय बाद ही बंद हो जाता है। पीएफओ उस छेद को कहा जाता है, जो बच्चे के जन्म के बाद स्वाभाविक रूप से बंद होने में विफल रहता है। प्रो. धीरज ने बताया कि यह भारतीय स्ट्रोक रोगियों में पीएफओ की व्यापकता को देखने वाला पहला शोध है। इसमें पीजीआई की इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को लिया गया। इस क्रॉस-सेक्शनल शोध में 345 युवा स्ट्रोक (आयु वर्ग 15-45 वर्ष) के युवा शामिल थे। इनमें 90 मामलों की पहचान क्रिप्टोजेनिक स्ट्रोक के रूप में की गई थी। इनमें से 57 युवा इस्केमिक क्रिप्टोजेनिक स्ट्रोक के शिकार हुए थे। इनकी उम्र 50 साल से कम थी और वे किसी अन्य समस्या के शिकार नहीं थे।
क्रिप्टोजेनिक स्ट्रोक
इस स्ट्रोक का कारण ज्ञात नहीं है। यह 30-40 प्रतिशत इस्केमिक स्ट्रोक के लिए जिम्मेदार होता है। इसमें रक्त का थक्का मस्तिष्क की ओर जाने वाली धमनी को अवरुद्ध कर देता है। भारत ही नहीं विश्व स्तर पर विशेष रूप से युवाओं में यह ज्यादा पाया जाता है। प्रो. धीरज ने बताया कि दिल का यह छेद एक साल की उम्र के बाद अपने आप बंद हो जाता है, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो कुछ व्यक्ति ऐसे हैं जिन्हें इस तरह के स्ट्रोक का खतरा हो सकता है।
जांच कर लगाते हैं पता
प्रो. धीरज ने बताया कि ऐसे मामले में ट्रांस क्रेनियल डॉपलर (टीसीडी) का उपयोग कर न्यूरोलॉजिस्ट दिल में छेद का पता लगा सकते हैं। मरीजों को आगे की जांच के लिए हृदय रोग विशेषज्ञों के पास भेज सकते हैं। टीसीडी मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को प्रभावित करने वाली स्थितियों का निदान करने के लिए एक अल्ट्रासाउंड मशीन है। प्रो. धीरज ने कहा कि यह स्ट्रोक और मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह से जुड़े अन्य विकारों के लिए एक उत्कृष्ट बेडसाइड स्क्रीनिंग जांच है।