चंडीगढ़। सांस के गंभीर मरीजों के इलाज में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए पीजीआई ने स्वदेशी हाई-फ्लो नेजल कैनुला सिस्टम ट्रूऑक्सी प्लस के लिए क्लैरिटी मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड, मोहाली के साथ ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (टीओटी) समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह अत्याधुनिक मेडिकल डिवाइस पूरी तरह देश में विकसित की गई है और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए किफायती, सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाला विकल्प उपलब्ध कराएगी।
यह परियोजना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से वर्ष 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई थी। प्रो. जी.डी. पुरी के नेतृत्व में यह शोध वर्ष 2024 में सफलतापूर्वक पूरा हुआ। इसका उद्देश्य आयातित और महंगे हाई-फ्लो ऑक्सीजन सिस्टम का स्वदेशी और भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप विकल्प विकसित करना था।
ट्रूऑक्सी प्लस सिस्टम में 60 लीटर प्रति मिनट तक सटीक फ्लो कंट्रोल, 21 से 100 प्रतिशत तक ऑक्सीजन सप्लाई और 31 से 37 डिग्री सेल्सियस तक तापमान नियंत्रण की सुविधा दी गई है। इसमें इंटीग्रेटेड मॉनिटरिंग, एडवांस अलार्म सिस्टम और मजबूत सेफ्टी फीचर्स शामिल हैं, जो इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाते हैं। डिवाइस का पीजीआई के बायोमेडिकल हब में एक वर्ष तक कड़ा परीक्षण किया गया, जिसके बाद 2024 में फेज-1 क्लिनिकल ट्रायल पूरा हुआ। फिलहाल फेज-2 क्लिनिकल ट्रायल जारी है।
इस साझेदारी के बाद अब इस डिवाइस का बड़े पैमाने पर निर्माण, इंजीनियरिंग ऑप्टिमाइजेशन और नियामक स्वीकृतियों की प्रक्रिया तेज होगी। इससे देशभर के अस्पतालों और आईसीयू में यह तकनीक किफायती दरों पर उपलब्ध हो सकेगी और आयातित उपकरणों पर निर्भरता कम होगी।
पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि वैश्विक मानकों के अनुरूप, सस्ती और स्वदेशी मेडिकल डिवाइस विकसित करना समय की जरूरत है। यह पहल न केवल मरीजों के इलाज को सुलभ बनाएगी, बल्कि देश को मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
इसे बनाने वाली टीम
एनेस्थीसिया और इंटेंसिव केयर विभाग की कोर टीम में प्रो. जी.डी. पुरी, डॉ. शिव लाल सोनी, डॉ. अजय सिंह, डॉ. नवीन नाइक बी. और इंजीनियर हरप्रीत सिंह शामिल रहे। प्रो. पुरी वर्तमान में एम्स जोधपुर के कार्यकारी निदेशक हैं। यह डिवाइस आईसीयू में तीव्र श्वसन विफलता, पोस्ट-ऑपरेटिव रिकवरी और एक्सट्यूबेशन के बाद मरीजों को सहारा देने में उपयोगी है तथा शोधों के अनुसार इससे दोबारा वेंटिलेशन की जरूरत कम होती है।